अंतर्राष्ट्रीय
30-Apr-2026
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काबुल,(ईएमएस)। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। पिछले कुछ समय से सीमा पर बनी शांति उस समय भंग हो गई, जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर कुनार प्रांत में भीषण हमले करने का गंभीर आरोप लगाया। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, कुनार प्रांत के असदाबाद और मनवर इलाकों में पाकिस्तानी फौज द्वारा किए गए मोर्टार और रॉकेट हमलों में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। इस हमले की सबसे भयावह तस्वीर तब सामने आई जब एक शैक्षणिक संस्थान इसकी चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि इस घटना में करीब 70 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 30 छात्र शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को एक शांति दूत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश के शिक्षण संस्थानों पर बमबारी के आरोपों ने उसकी दोहरी नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच यह तल्खी नई नहीं है। साल 2025 में भी कई बार सीमा पर भारी गोलीबारी हुई थी और 2026 की शुरुआत भी बारूद की गूंज के साथ हुई है। पाकिस्तान इन कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ जंग बताता है, जबकि अफगानिस्तान इसे अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करार देता है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक आबादी पर कायराना हमला बताया है। विरोध स्वरूप अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी दूतावास के प्रभारी (शाजे डी अफेयर्स) को तलब कर डूरंड लाइन के पास रिहायशी इलाकों और विशेषकर विश्वविद्यालय को निशाना बनाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इन दावों को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह खुफिया जानकारी पर आधारित होती है और उसने बलूचिस्तान सीमा से सटी केवल उन चौकियों को निशाना बनाया है जहाँ से सुरक्षा को खतरा था। इस बढ़ते तनाव ने चीन की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। बीजिंग के लिए यह विवाद सिरदर्द साबित हो रहा है क्योंकि उसके अरबों डॉलर के रणनीतिक और आर्थिक हित इस क्षेत्र से जुड़े हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा की सुरक्षा पूरी तरह इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है। यदि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो न केवल चीन का व्यापार और निवेश प्रभावित होगा, बल्कि उग्रवादी समूहों की सक्रियता बढ़ने से उसके शिनजियांग प्रांत में भी अस्थिरता फैलने का डर है। यही कारण है कि चीन लगातार दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि उसकी ऊर्जा परियोजनाएं और कनेक्टिविटी के सपने सुरक्षित रह सकें। फिलहाल, सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और कूटनीतिक स्तर पर जुबानी जंग जारी है। वीरेंद्र/ईएमएस 30 अप्रैल 2026