राज्य
30-Apr-2026


इन्दौर (ईएमएस) 25 वें जिला न्यायाधीश मनीष कुमार लोवंशी की कोर्ट ने वसीयत संपत्ति विवाद को लेकर दायर याचिका अवधि विधान कानून के तहत खारिज कर दी, 331 दिन के विलंब से पेश इस याचिका में हालांकि अवधि विलंब हेतु माफी मांगी गई थी परन्तु कोर्ट ने उसे नहीं माना। वारिसों की और से पैरवी अधिवक्ता केपी माहेश्वरी ने की। उनके अनुसार याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि किरण तिवारी एवं निर्मला शर्मा के पिता स्व. दौलतराम ने वसीयत निष्पादित की थी, जिसमें उनकी मृत्यु के बाद 155, परसराम मार्ग, गांधीनगर स्थित मकान दोनों के नाम होगा। उनकी मृत्यु फरवरी 2014 में हो गई जिसके बाद वसीयत के आधार पर दोनों पुत्रियों को 2 वर्ष पूर्व मकान का वारिस घोषित कर दिया। लेकिन जयंत शर्मा नामक व्यक्ति ने अपील दायर कर कहा कि 2012 में दौलतराम ने उक्त मकान बेचने का करार उससे किया था। पुत्रियों ने वारिस प्रकरण में उसे पार्टी नहीं बनाकर फैसला ले लिया गया है, इसलिए उसकी अपील स्वीकार करते हुए दौलतराम की पुत्रियों के हित में मकान के मालिकाना हक का फैसला निरस्त किया जाए। उसने अपनी अपील में ये भी कहा कि 331 दिन विलंब से प्रस्तुत करने पर डेस माफी दी जाए। याचिका सुनवाई दौरान कोर्ट ने वारिसों के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत हो पाया कि वास्तव में वारिसों का मामला केवल मृतक के वारिसों के मध्य ही चलता है, तीसरे व्यक्ति को इसमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। जिसके बाद कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जयंत शर्मा, स्व. दौलतराम का वंशज नहीं है। उसे दौलतराम की संपत्ति में वारिस नाते कोई अधिकार नहीं है। सुनवाई दौरान अदालत ने यह भी पाया कि निर्विवाद रूप से यह याचिका जयंत शर्मा ने 11 महिने बाद पेश की है और वह पूर्व निराकृत प्रकरण में पक्षकार नहीं रहा है। उसने वारिस प्रकरण में शामिल होने का कोई प्रयास नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि लम्बी अवधि पश्चात विलम्ब से बिना उचित कारण से याचिका प्रस्तुत करना जयंत शर्मा की स्वस्थ्य और स्वच्छ मानसिकता दर्शित नहीं करता है। कोर्ट ने अधिवक्ता केपी माहेश्वरी के तर्कों से सहमत होते हुए प्रार्थी का दावा समय बाधित होने से निरस्त कर दिया। प्रकरण पैरवी में उनके साथ प्रतीक माहेश्वरी, पवन तिवारी, अमृता सोनकर, पुनीत माहेश्वरी, सुनील यादव, हरिओम परमार, अर्जुन प्रजापति, महक मिरानी शामिल रहे। आनंद पुरोहित/ 30 मई 2026