पाकिस्तान सेना के विद्रोह का खतरा बढ़ा इस्लामाबाद (ईएमएस)। पहले से ही आर्थिक कंगाली, बलूच विद्रोहियों और अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अब एक नई और खूंखार चुनौती खड़ी हो गई है। वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा ने पाकिस्तान की ‘सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड सरकार’ को सीधी और गंभीर चेतावनी जारी की है। इस्लामाबाद और काबुल के बीच बढ़ती कड़वाहट के बीच अल-कायदा ने अपने मीडिया विंग ‘अस-सहाब’ के जरिए दो पन्नों का एक संदेश जारी किया है, जिसमें उसने पाकिस्तानी हुकूमत को खून के आंसू रुलाने की धमकी दी है। अल-कायदा की जनरल लीडरशिप ने अफगान तालिबान के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए पाकिस्तान को अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों से दूर रहने की नसीहत दी है। संगठन ने शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना पर अमेरिका व पश्चिमी ताकतों के साथ हाथ मिलाकर गद्दारी करने का संगीन आरोप लगाया है। अल-कायदा ने दशकों पुराने साझा उग्रवादी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान अब अफगान हितों के खिलाफ काम कर रहा है। अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का उल्लेख करते हुए संगठन ने इसे ‘जायोनी-क्रूसेडर’ साजिश का हिस्सा बताया है और तालिबान को इस क्षेत्र में वैचारिक बदलाव का रक्षक करार दिया है। इस चेतावनी की सबसे खतरनाक बात यह है कि अल-कायदा ने न केवल धमकी दी है, बल्कि सीधे पाकिस्तान के आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को उकसाने की कोशिश की है। आतंकी गुट ने पाकिस्तानी सेना के जवानों से अपील की है कि वे अपनी ही चुनी हुई सरकार और सैन्य नेतृत्व के आदेशों को मानना बंद कर दें और ‘जिहादी उद्देश्यों’ का साथ दें। जवानों को ‘एहसान का बदला’ चुकाने की बात कहकर अल-कायदा ने उन्हें अपनी धार्मिक जिम्मेदारी निभाने के नाम पर भड़काने का प्रयास किया है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अल-कायदा का यह बयान पाकिस्तान के भीतर छिपे असंतोष की आग में घी डालने जैसा है। सैन्य रैंकों के भीतर विद्रोह की बात करना यह संकेत देता है कि आतंकी संगठन अब पाकिस्तान को अंदरूनी तौर पर अस्थिर और खोखला करना चाहता है। पाकिस्तान की वर्तमान घरेलू परेशानियों और सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से का फायदा उठाकर अल-कायदा क्षेत्र में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की फिराक में है। अपनी ही सेना के खिलाफ जवानों को उकसाने की यह कोशिश पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े ‘टाइम बम’ की तरह देखी जा रही है, जो पहले से ही अस्थिर देश को तबाही की ओर धकेल सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/30अप्रैल2026