ट्रंप के शांति प्रस्ताव ठुकराने के बाद ईरानी तेवर बदले तेहरान(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां कूटनीति के दरवाजे लगभग बंद नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए नवीनतम शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का रुख स्पष्ट है—जब तक तेहरान परमाणु समझौते की कड़ी शर्तों को नहीं मानता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने इस आर्थिक और सैन्य घेराबंदी को पारंपरिक बमबारी से कहीं अधिक प्रभावी बताते हुए कहा कि इससे ईरान पर दबाव और बढ़ेगा, क्योंकि वह वर्तमान में काफी कमजोर स्थिति में है। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस नाकेबंदी के जवाब में अत्यंत आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। आईआरजीसी ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी नई सैन्य कार्रवाई की गई, तो अमेरिकी नौसेना के जहाजों को समुद्र में जलाकर खाक कर दिया जाएगा। ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस युद्ध में अकेला नहीं होगा, बल्कि उसका पूरा ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ (पश्चिम एशिया में सक्रिय ईरान समर्थित समूह) एक साथ हमला करेगा। यह स्थिति पूरे क्षेत्र को एक बहु-मोर्चा युद्ध की ओर धकेल सकती है, जिसमें ईरान सरप्राइज हमलों और नई सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल का दावा कर रहा है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी गतिरोध बरकरार है। पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए प्रस्ताव में ईरान ने पहले सीजफायर और होर्मुज मार्ग को खोलने की बात कही थी, जबकि परमाणु मुद्दे पर चर्चा को बाद के लिए टालने का सुझाव दिया था। हालांकि, अमेरिका पहले परमाणु कार्यक्रम पर ठोस और निर्णायक कदम चाहता है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस का दौरा कर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है ताकि इस संकट में रूस का समर्थन हासिल किया जा सके। वहीं, सऊदी अरब में हुई खाड़ी देशों की बैठक में ईरान की नाकेबंदी को अवैध करार देते हुए समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बहाल करने की मांग की गई है। इन सबके बीच, एक अजीबोगरीब विवाद ने भी जन्म ले लिया है। अमेरिका की योजना के तहत नए पासपोर्ट डिजाइन में डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर शामिल करने की चर्चा पर ईरान ने तीखा तंज कसा है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर इसे पासपोर्ट के बजाय सेल्फ-प्रमोशन ब्रोशर करार दिया। यह वाकयुद्ध दिखाता है कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह व्यक्तिगत और प्रतीकात्मक स्तर पर भी पहुंच चुकी है। फिलहाल, होर्मुज में जमी नाकेबंदी और समुद्र में गश्त लगाते जंगी जहाज किसी बड़े सैन्य विस्फोट की आशंका को प्रबल कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/30अप्रैल2026