राष्ट्रीय
30-Apr-2026


भोपाल,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया आदेश ने राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे में हलचल पैदा मचा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उच्च पदों का प्रभार देने और पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं है, भले ही संबंधित नियमों की वैधता का मामला अभी विचाराधीन हो। हाईकोर्ट ने कहा है कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा पदोन्नति नियम 2025 को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के बावजूद, सरकार को प्रशासनिक कार्यों को बाधित नहीं होने देना चाहिए। इसतरह के योग्य अधिकारियों को उच्च पदों का कार्यभार सौंपने और पदोन्नति की प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर संबंधित प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इससे लंबे समय से रुकी पदोन्नतियों को अब गति मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, संभावित कानूनी अड़चनों के चलते कई विभागों में पदोन्नति और प्रभार देने की प्रक्रिया रोकी गई थी, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभागों ने फिर से तैयारियां शुरू कर दी हैं और रिक्त पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी विभागों में कार्यकुशलता बढ़ेगी और लंबे समय से खाली पड़े पदों के कारण उत्पन्न समस्याओं में कमी होगी। आशीष दुबे / 30 अप्रैल 2025