इन्दौर (ईएमएस) आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र षट्खण्डागम को चिरकाल तक सुरक्षित रखने के लिए इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य चर्चा शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं कुल गोरव मुनि श्रुत संवेगी श्रमणमुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है। उन्होंने बताया कि आज शुक्रवार, 1 मई 2026 पूर्णिमा को शांतिनाथ भगवान के कलशाभिषेक के पावन अवसर पर यह ताम्रपत्र संस्करण समाजजनों के अवलोकनार्थ समवशरण मंदिर, कंचनबाग, इंदौर पर प्रस्तुत किया जाएगा। अशोक खासगीवाल, आजाद जैन ने समाजजनों से आह्वान करते हुए कहा है कि पधारकर ताम्रपत्रों पर लिखे गंए ग्रंथ का अवलोकन कर अपने जीवन को धन्य करें आनंद पुरोहित/ 30 अप्रैल 2026