राज्य
30-Apr-2026


* तकनीक, पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से श्रमिक हितों को मिला नया आयाम * ‘ई-श्रम’ और ‘श्रम सेतु’ जैसे डिजिटल नवाचारों से लाखों श्रमिकों को मिला लाभ अहमदाबाद (ईएमएस)| किसी भी राष्ट्र की प्रगति की इमारत उसके श्रमिकों के पसीने पर खड़ी होती है। 1 मई यानी ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ केवल एक दिन नहीं, बल्कि श्रम की साधना करने वाले करोड़ों कर्मयोगियों के योगदान को स्वीकार करने का पर्व है। इसी अवसर पर पूरे विश्व में हर वर्ष 1 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ या ‘मई दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में गुजरात आज श्रमिक सशक्तिकरण की नई परिभाषा लिख रहा है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार तकनीक और मानवीय संवेदना का समन्वय कर श्रमिकों को आर्थिक न्याय और सुरक्षा प्रदान करने में देशभर में अग्रणी भूमिका निभा रही है। वर्ष 2025 गुजरात के श्रम इतिहास में ऐतिहासिक सुधारों का वर्ष रहा है। श्रम, कौशल विकास और रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया के मार्गदर्शन में ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने तथा अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘जन विश्वास बिल’ के अंतर्गत गुजरात औद्योगिक संबंध अधिनियम और गुजरात दुकान एवं वाणिज्यिक संस्था अधिनियम में अपराधों के निपटान एवं दंड प्रावधानों को सरल बनाकर प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी किया गया है। इससे व्यापारियों और औद्योगिक इकाइयों के लिए कार्य सुगम होगा और परिणामस्वरूप श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। राज्य के श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु ‘श्रम सेतु पोर्टल’ एक महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम बनकर उभरा है। इस पोर्टल के माध्यम से ग्रेच्युटी, वेतन वृद्धि और छंटनी जैसे मामलों का ऑनलाइन निपटारा किया जा रहा है। वर्ष 2025 में इस प्रणाली के तहत कुल 5,550 आवेदनों का पारदर्शी तरीके से निपटान किया गया। इसी तरह निरीक्षण एवं अनुपालन प्रक्रियाओं को भी डिजिटल बनाते हुए 13,810 ऑनलाइन निरीक्षण किए गए। श्रमिक सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर ‘155372’ पर 18,402 कॉल प्राप्त हुए, जिनका समयबद्ध समाधान किया गया। सरकार के प्रयासों से विभिन्न उद्योगों द्वारा श्रमिकों को न्यूनतम वेतन एवं बोनस का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। वर्ष 2025 में 1,232 संस्थाओं के 7,655 श्रमिकों को 11.13 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन अंतर भुगतान किया गया। वहीं, दिवाली के अवसर पर 12.44 लाख से अधिक श्रमिकों को 2,029.17 करोड़ रुपये का बोनस प्रदान किया गया। इन सभी योजनाओं और आंकड़ों से स्पष्ट है कि गुजरात में श्रमिक अब अकेला नहीं है। तकनीक के माध्यम से सशक्त होकर राज्य देश के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन रहा है। जब श्रमिक समृद्ध होगा, तभी भारत वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेगा। भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण हेतु शुरू किए गए ‘ई-श्रम पोर्टल’ पर 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच राज्य में 4 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है, जिससे उन्हें भविष्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। सतीश/30 अप्रैल