राज्य
30-Apr-2026
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:: अमेज़न एक्सपोर्ट हाट में जुटे प्रदेशभर के निर्यातक, 2030 तक 80 बिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य :: इंदौर (ईएमएस)। वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मध्यप्रदेश के एमएसएमई और डी2सी ब्रांड्स अब सीधे अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। इंदौर अब ई-कॉमर्स निर्यात के एक नए और सशक्त केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। इसी कड़ी में गुरुवार को शहर में अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के सहयोग से एक्सपोर्ट हाट का सफल आयोजन किया गया। इस मंच ने न केवल उभरते उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से रूबरू कराया, बल्कि मध्यप्रदेश की निर्यात क्षमताओं को भी नई पहचान दी। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में भोपाल सहित आसपास के क्षेत्रों के 150 से अधिक निर्यातकों ने हिस्सा लिया। वर्तमान में मध्यप्रदेश के 8 हजार से अधिक निर्यातक अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय हैं। वस्त्र, हस्तशिल्प, होम डेकोर और खाद्य उत्पादों के मजबूत विनिर्माण आधार के चलते राज्य अब छोटे व्यवसायों के लिए वैश्विक विस्तार का प्रमुख केंद्र बन रहा है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने निर्यात व्यवसाय की स्थापना, लॉजिस्टिक्स, अंतर्राष्ट्रीय भुगतान और बाजार के अवसरों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर उद्यमियों का मार्गदर्शन किया। एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक एवं निर्यात आयुक्त चंद्रमौली शुक्ला ने इंदौर के व्यवसायों की सराहना करते हुए कहा कि ई-कॉमर्स निर्यात स्थानीय व्यवसायों को सीधे वैश्विक ग्राहकों से जुड़ने का सुनहरा अवसर दे रहा है। डिजिटल टूल्स के माध्यम से अब इंदौर के उत्पाद दुनिया भर में अपनी धाक जमा रहे हैं। वहीं, एमपीआईडीसी इंदौर के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) और जीआई टैग वाले उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर प्रदेश की विशिष्ट कला और उत्पादों को विश्व पटल पर स्थापित किया जा सकता है। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग इंडिया की प्रमुख श्रीनिधि कल्पवुड़ी ने विश्वास जताया कि इंदौर जैसे शहर वैश्विक मांग को पूरा करने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक 80 बिलियन डॉलर के संचयी ई-कॉमर्स निर्यात के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। स्थानीय उद्यमियों जैसे डिटवी एक्सपोर्ट्स के सचिन सुले ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे भारतीय वस्त्र विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों और टिकाऊ गुणवत्ता के साथ पहुँचाया जा रहा है। इससे न केवल व्यापार बढ़ रहा है, बल्कि भारतीय कारीगरी को भी विश्व स्तर पर सम्मान मिल रहा है। प्रकाश/30 अप्रैल 2026