* गुजरात हाईकोर्ट का निर्देश—एरोनॉटिकल सर्वे के बाद ही होगा अंतिम निर्णय, फिलहाल डिमोलिशन नोटिस रद्द अहमदाबाद (ईएमएस)| शहर में सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास बनी हाईराइज इमारतों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया सहित संबंधित अधिकारियों को इन इमारतों का एरोनॉटिकल सर्वे कराने का निर्देश दिया है। यह मामला तब उठा जब एयरपोर्ट अथॉरिटी ने 102.7 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को डिमोलिशन नोटिस जारी किए। हंसपुरा, नरोडा और नाना चिलोडा जैसे क्षेत्रों में स्थित इन इमारतों के डेवलपर्स ने इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। डेवलपर्स—महाल इंफ्रा, अबजीबापा इंफ्रा, प्रेयस इंफ्रा, बालाजी डेवलपर्स, कलश इंफ्रा और पार्थ डेवलपर्स—ने दलील दी कि उन्होंने सभी आवश्यक एनओसी प्राप्त कर ही निर्माण किया है। उनका कहना था कि ऊंचाई में अंतर जमीन की एलिवेशन के कारण है, न कि किसी अवैध निर्माण की वजह से। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील मेघा जानी ने कोर्ट में कहा कि सिविल एविएशन मंत्रालय के 2015 के नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में एरोनॉटिकल स्टडी अनिवार्य है, इसलिए किसी भी तोड़फोड़ से पहले वैज्ञानिक सर्वे जरूरी है। वहीं एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से एडवोकेट भद्रेश राजू ने तर्क दिया कि बिल्डर्स ने मूल एनओसी का उल्लंघन किया है और पहले अवैध हिस्सों को हटाया जाना चाहिए, उसके बाद ही किसी सर्वे या नई मंजूरी पर विचार हो सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्वे से पहले तोड़फोड़ पर जोर देना “तर्कहीन और अनुचित” है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आसपास के अन्य प्रोजेक्ट्स को संशोधित ऊंचाई की अनुमति दी गई है, ऐसे में बिना सर्वे कार्रवाई करना उचित नहीं। * कोर्ट का आदेश: - एरोनॉटिकल सर्वे अनिवार्य रूप से कराया जाएगा - सर्वे का खर्च डेवलपर्स वहन करेंगे - मौजूदा डिमोलिशन नोटिस रद्द किए गए हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि सर्वे के बाद कोई इमारत नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है या विमान संचालन के लिए खतरा बनती है, तो उसे हटाने का अधिकार अधिकारियों के पास रहेगा। इस फैसले के साथ अहमदाबाद में एयरपोर्ट के आसपास निर्माण मामलों में “पहले सर्वे, फिर कार्रवाई” का सिद्धांत लागू हो गया है, जो भविष्य के मामलों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है। सतीश/01 मई