लेख
01-May-2026
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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में एसआईआर से लेकर मतदान होने तक चुनाव आयोग, भारतीय जनता पार्टी तथा टीएमसी के बीच में लगातार टकराव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में जिस तरह से चुनाव आयोग चुनाव करा रहा है, उसकी चर्चा संपूर्ण भारतवर्ष में हो रही है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के चुनाव को लेकर जिस तरह से हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल तक मतदाता और टीएमसी अपनी लड़ाई लड़ रही है। ऐसी स्थिति इसके पहले कभी नहीं देखी गई। तार्किक विसगित के नाम पर पश्चिम बंगाल में पहली बार चुनाव आयोग ने एक करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर कर दिया था। उसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने के बाद अभी भी 62 लाख मतदाताओं को मतदान का अधिकार नहीं मिला। इसको लेकर पश्चिम बंगाल में पिछले कई महीनो से मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच में तनाव है। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल को लेकर जो नए-नए नियम बना रहा है। उसको लेकर भी बार-बार टीएमसी को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाकर लड़ाई लड़नी पड़ी है। चुनाव आयोग के मामले में न्यायपालिका का रुख हस्तक्षेप करने का नहीं होने से, टीएमसी को न्यायपालिका से जो राहत मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। उल्टे मतदाताओं के दस्तावेजों का परीक्षण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ट्रिब्यूनल बनाकर, न्यायपालिका ने न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी। उसके बाद भी मतदाता मतदान करने से वंचित रहे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जो पश्चिम बंगाल में हुआ है। रही-सही कसर अब एग्जिट पोल के माध्यम से पूरी होती हुई दिख रही है। राष्ट्रीय चैनल और कुछ ऐसी सर्वे एजेंसी है, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार एग्जिट पोल में पश्चिम बंगाल में बना दी है। भाजपा को 190 सीटों पर जीत मिलने का दावा एग्जिट पोल में किया गया, जो जमीनी हकीकत के विपरीत है। पश्चिम बंगाल के दो बांग्ला चैनलों ने भी एग्जिट पोल किया। उसमें 161 सीटें टीएमसी को और भाजपा को 71 सीटें तथा 49 सीटों पर कांटे की टक्कर बताई गई। आनंद बाजार पत्रिका समूह के बांग्ला न्यूज़ चैनल ने टीएमसी को 177 से लेकर 187 सीटें मिलने का अनुमान जताया। वहीं भारतीय जनता पार्टी को 100 सीटे मिलने की संभावना जताई है। एग्जिट पोल में भारी अंतर होने तथा जमीनी हकीकत के विपरीत एग्जिट पोल आने से पश्चिम बंगाल में घमासान शुरू हो गया है। चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर टीएमसी बार-बार सवाल खड़े करती रही है। ऐसी स्थिति में मतगणना के पहले टीएमसी ने फार्म 17 का रिकॉर्ड अपने सभी बूथ एजेंट से मंगा लिया है। टीएमसी ने पश्चिम बंगाल के सभी बूथ में उपयोग में लाई गई ईवीएम मशीन, उनके सीरियल नंबर तथा शुरू और अंतिम मत संख्या का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। मतगणना स्थल पर टीएमसी के सभी मतगणना एजेंटों को सूची उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि मतगणना के समय किसी किस्म की गड़बड़ी ना हो। पहली बार पश्चिम बंगाल में इस तरह की तैयारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने की है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत का आरोप टीएमसी हर स्तर पर लगाती आ रही है। ऐसी स्थिति में मतगणना के दौरान टीएमसी के एजेंट किसी भी किस्म की गड़बड़ी रोकने के लिये सजग होंगे। एग्जिट पोल ने एक तरह से मतगणना के पहले आग में घी डालने का काम किया है। भाजपा और चुनाव आयोग को लेकर टीएमसी आक्रामक है। वहीं ममता बनर्जी और टीएमसी के ऊपर चुनाव आयोग और भाजपा आक्रामक है। ऐसी स्थिति में मतगणना के दौरान और मतगणना के पश्चात किस तरह के हालात प. बंगाल में बनेंगे, इसको लेकर अभी से तरह-तरह की चिंता व्यक्त की जाने लगी है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी का गांव-गांव तक केडर है। इस बार टीएमसी ने भाजपा चुनाव आयोग से लड़ने की पूरी तैयारी की है। ऐसी स्थिति में मतगणना के दौरान चुनाव आयोग को सजग होने की जरूरत है। गड़बड़ी होने की स्थिति में पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था को संभालना बहुत मुश्किल होगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग को मतगणना और परिणाम घोषित करने में पारिदर्शिता एवं निष्पक्षता से हो, इसका प्रयास करना होगा। ताकि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति सही बनी रहे। चुनाव आयोग ने अभी तक बूथ-विधानसभा में हुए मतदान के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किये हैं। जिसके कारण चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनैतिक दलों का चुनाव आयोग पर विश्वास खत्म होता जा रहा है। चुनाव आयोग पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सभी दलों के साथ सहयोग करेगा। तभी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बढ़ेगी। चुनाव आयोग पूर्व की भांति मतदाता सूची से लेकर मतदान और मतगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक करना आवश्यक है। चुनाव आयोग को गंभीरता से इस पर विचार करने की जरूरत है। ईएमएस / 01 मई 26