राष्ट्रीय
02-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल कुछ लोग हैरान हैं कि आखिर गर्मी में दिल की धडकनें अपने आप क्यों बढ रही है। कई लोग इसे कोविड वैक्सीन से जोड़कर अफवाहें भी फैलाने लगे हैं, लेकिन विशेषज्ञ इन सभी बातों को खारिज करते हुए स्पष्ट कर रहे हैं कि दिल की धड़कन बढ़ने के पीछे और कुछ नहीं बल्कि यही प्रचंड गर्मी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह गर्मी सिर्फ कमजोर दिल वालों पर ही नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों पर भी गंभीर असर डाल रही है। इसका कारण समझना बेहद जरूरी है। हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है, जबकि आजकल बाहर का तापमान 41-43 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ऊपर जा रहा है। शरीर इस बाहरी गर्मी से निपटने के लिए एक स्वचालित प्रक्रिया अपनाता है। त्वचा तक जाने वाली रक्त धमनियों को चौड़ा कर देता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि अधिक से अधिक खून त्वचा की सतह के पास पहुंचे, जहां पसीना उसे ठंडा कर सके और फिर ठंडा हुआ खून वापस शरीर में संचारित हो। यह प्रक्रिया दिल पर सीधा दबाव डालती है। दिल एक पंप की तरह है, और जब रक्त ले जाने वाली नलिकाएं चौड़ी हो जाती हैं और उन्हें अधिक खून तेजी से पहुंचाना पड़ता है, तो पंप को अधिक जोर लगाना पड़ता है। जिस तरह एक गाड़ी का इंजन गर्म होने पर रेडिएटर का पंखा तेजी से चलता है, वैसे ही दिल को भी शरीर को ठंडा रखने के लिए तेजी से काम करना पड़ता है। सामान्य दिनों में दिल प्रति मिनट लगभग 5 लीटर खून पंप करता है, लेकिन भीषण गर्मी में यह 10-20 लीटर तक बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप, दिल की धड़कन भी प्रति मिनट 60-100 से बढ़कर 120-140 तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि गर्मी में सिर्फ खड़े रहने से भी दिल को सीढ़ियां चढ़ने जैसा अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जिससे स्वस्थ व्यक्ति भी थकान महसूस कर सकते हैं, और दिल के मरीजों के लिए यह स्थिति गाड़ी के इंजन के ओवरहीट होने जैसी खतरनाक हो सकती है। दूसरा गंभीर मसला निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर से पानी की कमी होती है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है। गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए दिल को और भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे रक्तचाप गिरने का खतरा रहता है, जिससे चक्कर आ सकते हैं। इसके अलावा, पसीने के साथ सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। ये इलेक्ट्रोलाइट्स दिल के सामान्य रूप से कार्य करने के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं, और इनकी कमी से दिल की धड़कन अनियमित या तेज हो सकती है, ठीक वैसे ही जैसे कम चार्ज वाली बैटरी लड़खड़ाने लगती है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह है कि अपनी धड़कन में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लें। लगातार पानी पीते रहें और ओआरएस घोल का सेवन करें, जो खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है। गर्मी से बचें, ठंडी जगह पर आराम करें, और शरीर को ओवरहीट होने से बचाएं। जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन स्वस्थ व्यक्तियों को भी अपनी धड़कन पर ध्यान देना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 02 मई 2026