नई दिल्ली (ईएमएस)। ऐसा कौन सा भारतीय राज्य है जिसके हिंदी नाम में कोई मात्रा नहीं लगती? यह सवाल जनरल नॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है, और अक्सर लोग इसका सही जवाब नहीं दे पाते। यह अनूठा राज्य कोई और नहीं बल्कि असम है। भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित असम अपनी खूबसूरत वादियों, घने चाय बागानों, समृद्ध संस्कृति और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। असम का इतिहास भी काफी पुराना और गौरवशाली है। प्राचीन समय में इसे कामरूप के नाम से जाना जाता था, और बाद में यहाँ अहोम वंश ने लगभग 600 सालों तक शासन किया, जिसने इस क्षेत्र को एक विशिष्ट पहचान दी। लगभग 78,438 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला असम, उत्तर-पूर्व भारत के प्रमुख राज्यों में से एक है। भौगोलिक दृष्टि से यह राज्य कई पड़ोसी क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इसकी सीमाएँ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और पश्चिम बंगाल से लगती हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी सीमाएँ भूटान और बांग्लादेश से भी जुड़ती हैं। वर्तमान में, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा हैं, जो राज्य के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। असम न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है, बल्कि यहाँ की सांस्कृतिक विरासत भी बेहद समृद्ध है। कामाख्या मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल इसे देश भर में एक विशेष पहचान दिलाते हैं। इसके अलावा, असम अपनी विश्व प्रसिद्ध चाय के बागानों, विशाल ब्रह्मपुत्र नदी और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यह राज्य विश्व प्रसिद्ध ‘काजीरंगा नेशनल पार्क’ का घर है, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए प्रसिद्ध है। इसके साथ ही, यहाँ की सुनहरी ‘मूगा सिल्क’ और आकर्षक बिहू नृत्य भी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करते हैं। कुल मिलाकर, असम एक ऐसा राज्य है जहाँ इतिहास, प्रकृति और संस्कृति का एक अनोखा और मनमोहक संगम देखने को मिलता है, जो इसे भारत का एक महत्वपूर्ण और आकर्षक हिस्सा बनाता है। बता दें कि भारत के अनेक राज्यों से जुड़े सवाल अक्सर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं, खासकर जब बात उनकी भाषाई विशेषताओं की हो। सुदामा/ईएमएस 02 मई 2026