* 2025-26 में 7,145 लाभार्थियों को रु. 7.14 करोड़ से अधिक सहायता, राशि रु. 5,000 से बढ़ाकर रु. 10,000 की गई गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के मार्गदर्शन और श्रम एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया के नेतृत्व में गुजरात सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के परिवारों को कठिन समय में सहारा देने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में ‘मरणोत्तर क्रिया–अंत्येष्टि सहायता योजना’ शुरू की गई थी। इस योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अब तक सर्वाधिक 7,145 वारिसों को कुल रु. 7.14 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में कुल 26,657 लाभार्थियों को रु. 13.73 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद दी जा चुकी है। यह योजना श्रमिक परिवारों के लिए दुख की घड़ी में महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। योजना के अनुसार, सहायता पाने के लिए मृतक असंगठित क्षेत्र का ई-श्रम कार्डधारक होना जरूरी है तथा मृत्यु के समय उसकी आयु 16 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही, वारिस की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में रु. 1.20 लाख और शहरी क्षेत्र में रु. 1.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। सरकार ने इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि को रु. 5,000 से बढ़ाकर रु. 10,000 कर दिया है। योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र वारिस को मृत्यु की तिथि से तीन माह के भीतर ‘परिशिष्ट-1’ के निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र और आवश्यक दस्तावेज गुजरात ग्रामीण श्रमयोगी कल्याण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। भरे हुए आवेदन संबंधित श्रम अधिकारी या श्रम आयुक्त कार्यालय में जमा करने होंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि इस योजना का लाभ निर्माण श्रमिकों (ई-निर्माण कार्डधारक) और अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को नहीं मिलेगा। अनुसूचित जाति के श्रमिकों के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा ‘सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र मरणोत्तर सहायता योजना’ लागू है, जबकि निर्माण श्रमिकों के लिए अलग से कल्याण बोर्ड की योजनाएं संचालित हैं। सतीश/02 मई