अंतर्राष्ट्रीय
02-May-2026
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होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच..... वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव अब एक नए और जटिल रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले दो महीनों से जारी इस संघर्ष की गति भले ही कुछ धीमी पड़ती दिख रही हो, लेकिन तनाव का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वर्तमान में इस टकराव का केंद्र दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर की गई नाकेबंदी ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस नाकेबंदी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ते नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए अब अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अमेरिकी प्रशासन अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक और सामूहिक सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस नई रणनीति के तहत ‘मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट’ यानी समुद्री स्वतंत्रता संरचना नाम का एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य करना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) मिलकर काम करेंगे। जहाँ विदेश विभाग विभिन्न देशों और शिपिंग कंपनियों के साथ कूटनीतिक समन्वय करेगा, वहीं सेंटकॉम समुद्री गतिविधियों की निगरानी और जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने का जिम्मा संभालेगा। दरअसल, फरवरी के अंत में हुए हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी, जिससे शिपिंग ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका की इस घेराबंदी का जवाब देने के लिए फोन डिप्लोमेसी का सहारा लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुर्की, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और इराक जैसे क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। ईरान ने इन देशों को संदेश दिया है कि क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल की नीतियां हैं। ईरान का कहना है कि वह शांति का पक्षधर है और उसने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की थी, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उसकी सेना पूरी तरह तैयार है। ईरान ने यह संकेत भी दिया है कि यदि अमेरिका अपना रुख बदलता है, तो बातचीत के रास्ते खुले हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि होर्मुज का यह संघर्ष अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि एक बड़े वैश्विक राजनीतिक और कूटनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुका है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए दूरगामी होंगे। वीरेंद्र/ईएमएस/02मई 2026