अंतर्राष्ट्रीय
03-May-2026
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क्या बिखर जाएगी आयतुल्लाह की सत्ता तेहरान,(ईएमएस)। ईरान की सत्ता के भीतर इन दिनों तेज होती खींचतान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के भीतर ‘हार्डलाइनर्स’ और अपेक्षाकृत व्यावहारिक रुख रखने वाले नेताओं के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ रहा है। इस संघर्ष के केंद्र में दो प्रमुख चेहरे हैं मोहम्मद बाघर गालिबफ और सईद जलीली है। यह विवाद केवल व्यक्तियों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि इस बात पर निर्णायक संघर्ष है कि ईरान भविष्य में टकराव की राह पर चलेगा या सीमित समझौतों की दिशा में आगे बढ़ेगा। मामला तब और गरमा गया जब गालिबाफ ने इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का नेतृत्व किया। उनके कदम को कट्टरपंथी धड़े ने ‘रेड लाइन’ पार करना बताया। खासतौर पर जलीली समर्थक गुट ‘पायदारी’ ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश की परमाणु नीति को कमजोर किया है। यह विवाद सीधे तौर पर परमाणु वार्ता और पश्चिम के साथ रिश्तों को लेकर है, जिसने ईरान की सत्ता संरचना में दरारें उजागर कर दी हैं। जलीली को ईरान में ‘लिविंग शहीद’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने ईरान-इराक जंग के दौरान अपना पैर खो दिया था। वे 2007 से 2013 तक देश के मुख्य परमाणु वार्ताकार रहे और उनके कार्यकाल में ईरान पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे। जलीली का रुख बेहद सख्त है वे अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ माने जाते हैं और ‘प्रतिरोध’ की नीति के समर्थक हैं। इसके विपरीत बाघर गालिबफ को ‘प्रैग्मैटिक हार्डलाइनर’ माना जाता है। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर रह चुके हैं और तेहरान के मेयर भी रहे हैं। गालिबाफ का मानना है कि ईरान की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पश्चिम के साथ सीमित स्तर पर संवाद जरूरी है। हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन अली खामेनेई से करीबी संबंधों ने उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत बनाए रखा है। ईरान की असली ताकत औपचारिक संस्थाओं के बजाय ‘बेत-एरहबरी’ नामक ढांचे में केंद्रित मानी जाती है, जहां से देश की नीतियां नियंत्रित होती हैं। इसमें मोजतबा खामेनेई की भूमिका भी अहम मानी जाती है। इसकारण सत्ता संघर्ष केवल संसद या सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे तंत्र के नियंत्रण को लेकर है। इस राजनीतिक संकट के साथ-साथ ईरान गंभीर आर्थिक चुनौतियों से भी जूझ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और व्यापारिक बाधाओं के कारण अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। बेरोजगारी और महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है। हालिया प्रदर्शनों और हिंसा ने यह संकेत दिया है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक संघर्ष से अमेरिका को रणनीतिक फायदा मिल सकता है। अगर ईरान की नेतृत्व क्षमता कमजोर होती है या निर्णय लेने में देरी होती है, तब अमेरिका को कूटनीतिक बढ़त मिल सकती है। वहीं, अगर जलीली जैसे कट्टरपंथी नेता मजबूत होते हैं, तब टकराव की संभावना और बढ़ सकती है। आशीष/ईएमएस 03 मई 2026