राष्ट्रीय
03-May-2026
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अटूट आस्था और अदम्य साहस का दिखा नतीजा केदारनाथ,(ईएमएस)। देवभूमि उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम रास्तों के बीच स्थित केदारनाथ धाम की यात्रा अच्छे-अच्छों के पसीने छुड़ा देती है, लेकिन महाराष्ट्र की एक 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने जो कर दिखाया है, उसने आस्था और संकल्प की एक नई परिभाषा लिख दी है। अपनी उम्र को महज एक आंकड़ा साबित करते हुए इन आजी (दादी) ने केदारनाथ मंदिर तक की बेहद कठिन और खड़ी चढ़ाई को बिना किसी पालकी, घोड़े या अन्य सहायता के केवल अपने पैरों के दम पर पूरा किया। समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए करीब 22 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। इस मार्ग पर ऑक्सीजन की कमी, हाड़ कंपा देने वाली ठंड और पथरीले रास्ते युवाओं के लिए भी बड़ी चुनौती होते हैं। ऐसे में 73 साल की उम्र में इस यात्रा को पैदल तय करने का निर्णय लेना ही अपने आप में साहसी कदम था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके वीडियो और तस्वीरों ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है, जिसमें वे पूरे जोश के साथ जय शिवाजी, जय भवानी और हर हर महादेव के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रही हैं। यात्रा के दौरान जब अन्य श्रद्धालुओं ने उन्हें संघर्ष करते देखा और मदद की पेशकश की, तो उन्होंने बड़ी ही विनम्रता और मुस्कुराहट के साथ उसे ठुकरा दिया। उनके चेहरे पर थकान का कोई नामोनिशान नहीं था, बल्कि बाबा केदार के दर्शन की तड़प और अटूट विश्वास साफ झलक रहा था। उनके इस जज्बे ने रास्ते में चल रहे अन्य यात्रियों में भी ऊर्जा भर दी। आज के दौर में जहां अधिकांश लोग सुविधाओं पर निर्भर हैं और शारीरिक कष्ट से बचने के लिए पालकी या हेलीकॉप्टर का सहारा लेते हैं, वहां इन बुजुर्ग महिला की यह यात्रा श्रद्धा की पराकाष्ठा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और ईश्वर के प्रति गहरी आस्था हो, तो शरीर की सीमाएं कभी भी लक्ष्य के आड़े नहीं आतीं। महाराष्ट्र की इस आजी ने न केवल केदारनाथ की चढ़ाई पूरी की, बल्कि वे दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/03मई 2026