भारत के रणनीतिक बैकयार्ड में ड्रैगन की सेंध का प्रयास नई दिल्ली,(ईएमएस)। जासूसी की अपनी पुरानी फितरत को दोहराते हुए चीन ने एक बार फिर बंगाल की खाड़ी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। बीजिंग का अत्याधुनिक रिसर्च वेसल और जासूसी जहाज ‘शी यान 6’ भारतीय समुद्री सीमा के करीब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में दाखिल हो चुका है। सैटेलाइट इमेजरी और विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए नक्शों से इस बात की पुष्टि हुई है कि मालदीव के माले में ईंधन और रसद भरने के बाद यह जहाज अब सीधे भारत के रणनीतिक बैकयार्ड की टोह लेने के मिशन पर निकल पड़ा है। यह जहाज मार्च 2025 में हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल हुआ था और तब से लगातार भारत की समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहा है। शी यान 6 का यह मिशन केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह साइलेंट किलर जहाज चार प्रमुख तरीकों से भारत की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है। सबसे बड़ा खतरा समुद्री सतह के नीचे का डेटा चोरी करना है, जो भविष्य में चीनी पनडुब्बियों के लिए गुप्त रास्ते बनाने में मदद कर सकता है। चीन की इस चालबाजी का दूसरा बड़ा कारण उसका मलक्का डिलेमा है। चीन का लगभग 80 प्रतिशत तेल व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जहाँ भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक गेटकीपर की भूमिका निभाता है। चीन चाहता है कि वह इस प्रोजेक्ट की भौगोलिक और सैन्य जानकारी समय से पहले जुटा ले, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में भारतीय नाकेबंदी को चकमा दिया जा सके। भले ही चीन इसे रिसर्च वेसल कहे, लेकिन यह जहाज एडवांस सेंसर, सोनार और टेलीमेट्री उपकरणों से लैस है। यह भारत के मिसाइल परीक्षणों और पनडुब्बी की गतिविधियों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के बंदरगाहों का इस्तेमाल कर चीन भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति को भी चुनौती दे रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस जासूसी जहाज की हर हलचल पर पैनी नजर रख रही हैं, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में इसकी मौजूदगी सीधे तौर पर भारत की समुद्री संप्रभुता और आगामी रणनीतिक परियोजनाओं को प्रभावित कर सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/03मई 2026