क्षेत्रीय
03-May-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। अशोकनगर चौक से बिरकोना वार्ड क्रमांक 64 महामाया नगर तक जाने वाला मार्ग अब आवागमन का जरिया नहीं, बल्कि रोज़ाना खतरे का रास्ता बन चुका है। तीन साल से जर्जर पड़ी सडक़, जगह-जगह गड्ढे और रात में पसरा अंधेरा—ये हालात सीधे तौर पर व्यवस्था की नाकामी को उजागर करते हैं। इस मार्ग से गुजरने वाला हर व्यक्ति जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर है। रोज़ गुजरते हजारों लोग, फिर भी अनदेखी यही सडक़ सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पंडित सुंदरलाल विश्वविद्यालय, पत्रकार कॉलोनी और 10 से अधिक आवासीय क्षेत्रों को जोड़ती है। यानी रोज़ हजारों लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसके बावजूद हालात जस के तस हैं। स्थानीय निवासी रामप्रसाद साहू साफ कहते हैं—हर दिन छोटी घटनाएं हो रही हैं, हालात बड़े हादसे की तरफ इशारा कर रहे हैं। सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा? नाली निर्माण में भी ‘खेल’? हाल ही में कराए गए नाली निर्माण पर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेता अंकित का दावा है कि निर्माण पूरी तरह गुणवत्ता विहीन है। कुछ ही दिनों में दरारें दिखने लगी हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। मांग उठी है कि पूरे काम की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय हो। जनता त्रस्त, कांग्रेस आक्रामक मुद्दा अब सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है—अगर जल्द सुधार नहीं हुआ और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सडक़ पर आंदोलन होगा। धरना, चक्का जाम और घेराव जैसे कदम उठाए जाएंगे। यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बढ़ते जनाक्रोश की राजनीतिक अभिव्यक्ति है। बच्चों-बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा स्थानीय निवासी प्रकाश कश्यप बताते हैं—उड़ती धूल, टूटी सडक़ और अंधेरा रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और वाहन चालक सबसे ज्यादा खतरे में हैं। शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला। प्रशासन का जवाब, लेकिन भरोसा कमजोर महापौर पूजा विधानी का कहना है कि सडक़ और नाली निर्माण कार्य जारी है, गुणवत्ता का ध्यान रखा जाएगा और शिकायतों की जांच भी होगी। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। सवाल अब भी खड़ा है जब सडक़ जीवनरेखा होती है, तो उसकी यह हालत सिर्फ बदहाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का दस्तावेज बन जाती है। अशोकनगर-बिरकोना मार्ग आज उसी असफलता का प्रतीक है—जहां हर गुजरता दिन यह पूछता है कि जिम्मेदारी आखिर तय कब होगी? मनोज राज 03 मई 2026