नई दिल्ली (ईएमएस)। संतुलित और पौष्टिक आहार बच्चों में मजबूत सेहत की बुनियाद रखता है, जबकि गलत खानपान उनकी वृद्धि और विकास में बाधा डाल सकता है। बच्चों द्वारा ग्रहण किया गया प्रत्येक आहार उनके शरीर, मस्तिष्क और समग्र विकास पर सीधा और गहरा प्रभाव डालता है। इसलिए, उनके भोजन को हल्के में लेना एक बड़ी भूल हो सकती है, जिसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। वर्तमान में, हमारे बच्चों को पिज्जा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट, केक, बिस्कुट, नमकीन और कोल्ड ड्रिंक जैसे जंक फूड का बहुत शौक है। ये चीजें स्वाद में भले ही लुभावनी लगती हों और तुरंत संतुष्टि देती हों, लेकिन इनके अंदर पोषक तत्वों की मात्रा नगण्य होती है, और ये अत्यधिक वसा, चीनी तथा नमक से भरपूर होते हैं। जंक फूड की परिभाषा ही ऐसे भोजन की है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, खनिज और फाइबर की कमी हो और हानिकारक तत्वों की अधिकता हो। धीरे-धीरे यही आदतें बच्चों की सेहत को अंदर से खोखला करने लगती हैं। शुरुआत में शायद इसका तत्काल असर न दिखे, लेकिन समय के साथ मोटापा, शारीरिक कमजोरी, एकाग्रता में कमी और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। यह न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है, बल्कि उनकी मानसिक चुस्ती और पढ़ाई-लिखाई पर भी नकारात्मक असर डालता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए नमक, चीनी और तेल का सेवन अत्यधिक सीमित होना चाहिए। एक दिन में लगभग 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। इसी प्रकार, चीनी की मात्रा 20 से 25 ग्राम (लगभग 4 से 5 छोटी चम्मच) और तेल 25 से 30 ग्राम (लगभग 5 से 6 छोटी चम्मच) से अधिक नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से, दो साल से कम उम्र के बच्चों के आहार में नमक और चीनी को बिल्कुल शामिल नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका शरीर अभी विकास की नाजुक अवस्था में होता है और ये तत्व उनके गुर्दों व अन्य अंगों पर अनावश्यक बोझ डालते हैं। अत्यधिक जंक फूड का सेवन बच्चों में मोटापे को बढ़ावा देता है, जिससे आगे चलकर मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, यह बच्चों की एकाग्रता शक्ति और याददाश्त पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे उनकी पढ़ाई और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है, और वे चिड़चिड़े या सुस्त महसूस कर सकते हैं। हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि बच्चों को स्वादिष्ट भोजन से वंचित रखा जाए। आवश्यकता केवल सही और स्वस्थ विकल्पों को चुनने की है। जंक फूड की जगह हम बच्चों को कई स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प दे सकते हैं, जैसे ताजे मौसमी फल, सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स), भुने हुए चने, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी शिकंजी, लस्सी, ताजे फलों का जूस (बिना अतिरिक्त चीनी), रागी के लड्डू और घर की बनी चटनियां। ये खाद्य पदार्थ न केवल बच्चों को स्वाद प्रदान करेंगे बल्कि उन्हें आवश्यक पोषण भी देंगे और उनकी ऊर्जा को बनाए रखेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बचपन से ही बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित की जाएं। सुदामा/ईएमएस 04 मई 2026