स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएस का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू वॉशिंगटन,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे विदेशी वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक व्यापक सैन्य और मानवीय अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस मिशन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मिसाइल डिस्ट्रॉयर (विध्वंसक), 100 से अधिक लड़ाकू विमान, उन्नत ड्रोन तकनीक और लगभग 15,000 सैनिकों को तैनात किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में फंसे कई जहाज भोजन, पानी और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक मानवीय कदम बताते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान ने इस बचाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न की, तो अमेरिका उससे सख्ती से निपटेगा। ट्रंप ने विश्वास जताया कि इस पहल से न केवल फंसे हुए निर्दोष जहाजों को राहत मिलेगी, बल्कि ईरान सहित मध्य पूर्व के अन्य देशों को भी लाभ होगा। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस अभियान को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रक्षक करार दिया है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा और बड़ी मात्रा में गैस व उर्वरक गुजरते हैं। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर रखा था, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर संकट मंडरा रहा था। ईरान ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद के उप-अध्यक्ष अली निकजाद ने साफ किया कि वे युद्ध पूर्व वाली स्थिति पर वापस नहीं लौटेंगे। इस बीच, ईरानी मीडिया ने कुछ जहाजों को दस्तावेज जांच के नाम पर रोकने की पुष्टि की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं ने इसे जहाजों पर हमलों की एक कड़ी बताया है। इन सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ सकारात्मक चर्चा कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान द्वारा पेश किए गए 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर अपना जवाब भेज दिया है, जिसकी वर्तमान में ईरानी नेतृत्व समीक्षा कर रहा है। हालांकि परमाणु मुद्दे पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है, लेकिन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के माध्यम से जहाजों की आवाजाही शुरू होना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यह बातचीत सफल रहती है, तो यह न केवल होर्मुज को पूरी तरह खोलने का रास्ता साफ करेगी, बल्कि मध्य पूर्व में युद्ध समाप्ति की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/04मई 2026