क्षेत्रीय
04-May-2026
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झाँसी (ईएमएस)। झांसी महानगर में सिटी बस के संचालन को लगभग 5 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन इस सिटी बस सेवा से विभाग को नुकसान ही मिल रहा है फिर भी जनहित को देखते हुए इसको चलाया जा रहा है यह सिटी बस रेलवे स्टेशन से चिरगांव तक बस स्टैंड से बरुआ सागर तक जेल चौराहा से बबीना तक चल रही है इनमें से प्रेम नगर से कोछाभंवर तथा कोच भावर से रक्सा तक के रूट को कैंसिल कर दिया गया है। इस सिटी बस की सेवा सवारियों को भी खूब रास आ रही है इसकी वजह है इसका वाटनूकुलित और आरामदायक होना। और इसका किराया भी अगर देखा जाए तो प्राइवेट बस और ऑटो से काफी कम है। अधिकतर समय यह बसें सवारी से खचाखच भरी नजर आती है ऐसे में इनकी आमदनी कम होने पर प्रश्न चिन्ह उठाना जायज है ऐसा संदेह जाता जा रहा है कि कहीं इसमें कोई बड़ा खेल तो नहीं हो रहा। महानगर के लोकल यात्रियों को कम दाम में आरामदायक सफर तय करने के लिए स्मार्ट सिटी योजना से वर्ष 2021 में 25 बस को सड़क पर उतर गया था इनके संचालन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम को सौंप गई है।एक प्राइवेट कंपनी से अनुबंध पर उतारी गई इन इलेक्ट्रिक बस की खासियत है कि यह तो ना प्रदुषण करती है और ना ही आवाज करती है।इनके अंदर लगे एयर कंडीशनर अंदर के वातावरण को ठंडा बनाए रखते हैं यात्रियों को तो बस में सुख सुविधा मिल रही है लेकिन इस सेवा से शासन को जबरदस्त घाटा उठाना पड़ रहा है। यहां तक की इस पर होने वाला खर्च तक इसकी आमदनी से नहीं निकल पा रहा है वर्तमान में 21 बस सड़क पर दौड़ रही है जबकि चार खराब पड़ी है। इन सिटी बस पर हर माह लगभग 76 लख रुपए का खर्च आ रहा है। लेकिन उनकी आय मात्र 21 लख रुपए तक ही हो पा रही है रोडवेज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक बस प्रतिदिन 180 किलोमीटर की दूरी तय करती है जिसका भुगतान ₹70 प्रति किलोमीटर के हिसाब से कंपनी को किया जाता है। इस तरह एक बस पर प्रतिदिन 12600 खर्च किए जा रहे हैं यानी 21 बस पर प्रतिदिन 24000 रुपए का भुगतान किया जा रहा है इस हिसाब से इन बस के संचालन पर हर माह लगभग 75 लख रुपए का खर्च आ रहा है अब अगर इससे होने वाली आय की बात करें तो एक बस से प्रतिदिन 3 से 3:30 हजार रुपए की आय होती है और सभी बस रोजाना लगभग 76000 और माह में लगभग 21 लख रुपए ही कमा रही है इस तरह से एक सिटी बस चलाने पर हर माह 55000 का नुकसान हो रहा है। इस बारे में संतोष कुमार क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम झांसी का कहना है कि सरकार सिटी बस लाभ हानि के लिए नहीं बल्कि जन सुविधा के लिए चलवाती है। जो आमदनी होती है वह नगरीय निदेशालय के पास भेज दी जाती है वहां से कंपनी को भुगतान किया जाता है। बस में बिना टिकट यात्रा करवा ने पर पकड़े जाने वाले कंडक्टर को तुरंत नौकरी से हटा दिया जाता है पहले भी कई कंडक्टर पकड़े जा चुके हैं जिनको नौकरी से हटाया जा चुका है।बीच-बीच में निरीक्षक बस में बैठी सवारी और टिकट का मिलान करते हैं और जांच रिपोर्ट भेजते हैं। - शरद शिवहरे /ईएमएस /4मई