- राष्ट्रीय सरपंच संघ की सरकार से मांग - गांवों में निर्माण के लिए मुरम-पत्थर निकालने की छूट मिले भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश में सरपंचों का कार्यकाल 4 साल का होने वाला है, लेकिन गांवों के विकास को लेकर सरपंचों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बजट की कमी और सरकारी नियमों की उलझनों की वजह से वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इसी गुस्से को लेकर राष्ट्रीय सरपंच संघ ने सरकार के सामने अपनी मांग रखी है। उनका कहना है कि मनरेगा पेमेंट का अधिकार पंचायत के पास हो। सरपंच संघ के अध्यक्ष मनोज सोलंकी का कहना है कि पंचायतों को उनके हक मिलने चाहिए। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि मनरेगा का पेमेंट करने वाला अधिकार (डीएससी) जनपद ऑफिस के बजाय सीधे पंचायत के पास हो। साथ ही, गांवों में निर्माण काम के लिए पत्थर, मिट्टी और मुरम निकालने की छूट दी जाए। सरपंचों ने यह भी मांग की है कि बार-बार तकनीकी मंजूरी (टी.एस.) के चक्कर काटने के बजाय एक बार ऑनलाइन डीपीआर बनने पर ही उसे फाइनल मान लिया जाए। कर्मचारियों पर लगाम और सीआर की मांग सरपंचों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के सरकारी कर्मचारियों, जैसे सचिव, रोजगार सहायक, शिक्षक, पटवारी और आशा कार्यकर्ताओं की गोपनीय रिपोर्ट (सीआर) लिखने का अधिकार सरपंच को मिले। उनका कहना है कि जब तक इन कर्मचारियों का वेतन और छुट्टी सरपंच के हाथ में नहीं होगी, तब तक गांव की व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पाएगी। सरपंचों का कहना है कि आज के समय में साल 2022 के रेट से पैसा दिया जा रहा है, जबकि महंगाई बहुत बढ़ गई है। उन्हें अब 2025-26 के नए रेट चाहिए। साथ ही, मुख्यमंत्री की घोषित 50,000 रुपए की स्वेच्छा अनुदान निधि को भी लागू करने की मांग की गई है। सरपंचों ने यह भी कहा कि जब वे काम के सिलसिले में भोपाल जाएं, तो उनके ठहरने के लिए सरकारी विश्राम गृह की सुविधा मिलनी चाहिए। भ्रष्टाचार रोकने और नई योजनाओं की मांग संघ ने साफ कहा है कि अगर किसी काम में सरपंच के साइन नहीं हैं, तो उसका पेमेंट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो इसके लिए जनपद सीईओ को जिम्मेदार मानकर उन पर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, बंद पड़ी हितग्राही योजनाएं जैसे पशु शेड और बकरी शेड को फिर से शुरू करने और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग भी की गई है। विनोद / 04 मई 26