जॉर्जिया ने कहा- ये दुष्प्रचार का खतरनाक तरीका रोम(ईएमएस)। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दुरुपयोग ने अब विश्व के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा और छवि के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसी क्रम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी डीपफेक और एआई के गलत इस्तेमाल का नया निशाना बनी हैं। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर अपनी फर्जी तस्वीरों के प्रसारित होने पर गहरी चिंता जताई है और इसे लोकतंत्र व व्यक्तिगत गरिमा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि उनके विरोधियों द्वारा एआई से निर्मित उनकी नकली तस्वीरों को असली बताकर फैलाया जा रहा है। मेलोनी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जिसने भी ये तस्वीरें बनाई हैं, उन्होंने कम से कम उन्हें दिखने में काफी बेहतर बना दिया है। हालांकि, उन्होंने तुरंत इस बात पर जोर दिया कि यह मामला सिर्फ हंसी-मजाक का नहीं है, बल्कि दुष्प्रचार का एक खतरनाक तरीका है। उन्होंने कहा कि आज किसी की भी छवि बिगाड़ने और झूठी खबरें गढ़ने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। मेलोनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि डीपफेक एक खतरनाक हथियार है, जिसका उपयोग लोगों को गुमराह करने और मैनिपुलेट करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि वह एक प्रधानमंत्री के तौर पर अपना बचाव करने में सक्षम हैं, लेकिन आम नागरिक इस तकनीक के हमले से खुद को नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने जनता से एक विशेष अपील की कि किसी भी सूचना या तस्वीर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। उन्होंने एक मूल मंत्र साझा किया: यकीन करने से पहले जांचें, और शेयर करने से पहले यकीन करें। डीपफेक का यह खतरा केवल इटली तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भी यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भारतीय फिल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एआई की मदद से उनके चेहरे का गलत इस्तेमाल किया गया था। इसी तरह, अभिनेता आमिर खान का भी एक फर्जी वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें एक राजनीतिक दल का प्रचार करते दिखाया गया था। इन बढ़ती घटनाओं ने तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियमों और जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/06मई 2026 ---------------------------------