राष्ट्रीय
06-May-2026
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-कांग्रेस नेता ने जो कुछ भी कहा था वह सच साबित हुआ, वह दूरदर्शी नेता मुंबई,(ईएमएस)। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की निवर्तमान सीएम ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बात नहीं सुनकर और उनसे गठबंधन के संबंध में वार्ता ना करके बड़ी गलती की, वरना विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ और ही होते। ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। यहां पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत लोकतंत्र की जीत नहीं है, क्योंकि एसआईआर के जरिए लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं की हार के बावजूद, इंडिया गठबंधन का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जो कुछ भी कहा था वह सच साबित हुआ। वह एक दूरदर्शी नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने भी एक समय अधिकांश राज्यों में जीत हासिल की थी, फिर भी उन्हें बाद में करारी हार का सामना करना पड़ा। राउत ने कहा कि बीजेपी भी इस समय शिखर पर है और भविष्य में उसे भी हार का सामना करना पड़ेगा। राउत ने बुधवार को कहा कि ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। मैंने उनकी बातों को ध्यान से सुना और समझा। उन्होंने पहली बात यह कही कि चुनाव आयोग विलेन है और इसी विलेन ने चुनाव जीता है। दूसरी बात उन्होंने कही कि पोलिंग बूथों और काउंटिंग सेंटरों पर डराया-धमकाया गया, जो कि बहुत शर्मनाक था। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया है कि 100 विधानसभा सीटों पर धांधली हुई और लाखों नाम हटा दिए गए, उनके मुताबिक ये बातें सच हैं। उन्होंने कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनकी नैतिक जीत है और वह खुद को जीता हुआ मानती हैं। शिवसेना सांसद ने कहा कि ममता दीदी हमेशा से एक आंदोलनकारी रही हैं, चाहे वह सीएम हों, सत्ता में हों या विपक्ष में। सीएम रहते हुए भी वह ईडी और केंद्र सरकार जैसी एजेंसियों के खिलाफ सड़कों पर उतरी हैं। अगर वह कह रही हैं कि वह इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि वह हारी नहीं हैं, तो मैं इसे उनके विरोध के एक हिस्से के रूप में देखता हूं। यह एक आंदोलन है, सरकार के रवैये के खिलाफ एक तरह का प्रतिरोध है और मेरा मानना है कि ऐसा आंदोलन होना चाहिए। बता दें पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 207 सीटें जीती हैं, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली है। पहली बार चुनाव में उतरी हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को भी 2 सीटें मिलीं, जबकि लेफ्ट और एआईएसएफ के खाते में 1-1 सीट आई। सिराज/ईएमएस 06मई26