-सतलोक आश्रम, बैतूल की जागरूकता पहल के तहत एम्स भोपाल को 130 देहदान पंजीकरण फॉर्म प्राप्त हुए, जो एक संगठित रूप से मिला बड़ा योगदान है। -वर्ष 2013 से एनाटॉमी विभाग देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय है और अपनी उत्कृष्ट शिक्षण व नैतिक कार्यप्रणाली के लिए पहचान बना चुका है। -अब तक 1,594 पंजीकरण और 173 सफल देहदान प्राप्त हो चुके हैं, जो समाज में बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं। -देहदान मेडिकल शिक्षा, शोध और सर्जरी प्रशिक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे भविष्य के डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण मिलता है।एम्स भोपाल ने लोगों से इस पुनीत कार्य में भागीदारी की अपील की है, जिससे समाज और चिकित्सा क्षेत्र को लाभ मिल सके। भोपाल (ईएमएस) । एम्स भोपाल लगातार चिकित्सा शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसी क्रम में, एम्स भोपाल के एनाटॉमी विभाग को सतलोक आश्रम, बैतूल द्वारा संचालित एक सामूहिक जागरूकता अभियान के माध्यम से 130 देहदान पंजीकरण फॉर्म प्राप्त हुए हैं। यह संस्थान के देहदान कार्यक्रम के तहत प्राप्त सबसे बड़े संगठित योगदानों में से एक है। एम्स भोपाल का एनाटॉमी विभाग वर्ष 2013 से देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभाग ने अपने उत्कृष्ट एनाटॉमी शिक्षण, नैतिक मानकों और कैडावर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से व्यापक पहचान हासिल की है। इन प्रयासों के चलते लोगों में संस्थान के प्रति विश्वास भी लगातार बढ़ा है। अब तक विभाग को कुल 1,594 देहदान पंजीकरण प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 173 देहदान सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि समाज में इस पुनीत कार्य के प्रति जागरूकता और स्वैच्छिक भागीदारी बढ़ रही है। देहदान चिकित्सा शिक्षा की आधारशिला है, जिससे छात्र, सर्जन और शोधकर्ता मानव शरीर की संरचना को गहराई से समझ पाते हैं। इस संबंध में विभाग ने कहा कि देहदाता हमारे सर्वोच्च शिक्षक होते हैं, जो जीवन के बाद भी शिक्षा देकर भविष्य के डॉक्टरों को तैयार करते हैं और अनेक जिंदगियों को बचाने में योगदान देते हैं। विभाग ने इस सामूहिक पहल में भाग लेने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे मानवता, सामाजिक जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। एम्स भोपाल का देहदान कार्यक्रम समर्पित एनाटॉमी टीम द्वारा पूरी गरिमा, सम्मान और नैतिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। यह उपलब्धि समाज में एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है, जहां अधिक से अधिक लोग देहदान को मानवता के लिए अंतिम योगदान के रूप में अपना रहे हैं। एम्स भोपाल ने आम नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों से इस पुनीत कार्य में आगे आकर भाग लेने की अपील की है, ताकि इस मिशन को और मजबूत किया जा सके। ईएमएस/06मई2026