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06-May-2026
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है, जिसके बाद अब वंदे मातरम के अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने पर सख्त सजा और जुर्माना हो सकता है। यह महत्वपूर्ण फैसला राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिलने के बाद आया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम पर अब वहीं नियम और पाबंदियां लागू होंगी, जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू होती हैं। इसका स्पष्ट अर्थ है कि राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान के लिए वर्तमान में जेल, जुर्माना या दोनों का जो प्रावधान है, वहीं अब वंदे मातरम पर भी लागू होगा। केंद्र सरकार यह बदलाव वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर कर रही है, जिसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन होगा। इस धारा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या गाने से रोकता है, तब उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। फिर अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, मोदी सरकार ने भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी इन दिशानिर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए। इसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह, तथा इसतरह के समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण निर्देश है कि यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तब पहले ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’ गाया जाएगा। दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें। मंत्रालय ने स्कूल-कॉलेज और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का आग्रह किया है, जिसका उद्देश्य छात्रों और लोगों के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान पैदा करना है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तब उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए। हालांकि, सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट दी गई है। निर्देशों के अनुसार, यदि वंदे मातरम फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में बजाया जाता है, तब दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों पर दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से भ्रम पैदा हो सकता है। आशीष दुबे / 06 मई 2026