राज्य
06-May-2026
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• एम्स भोपाल की ट्रांसप्लांट टीम और मध्य प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। • आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज बढ़ाने तथा हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट को शामिल करने पर जोर दिया गया। • ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान और अंग प्राप्ति प्रक्रिया को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। • बैठक में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि ब्रेन-डेड मरीजों से अंग प्राप्ति और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सके। • माननीय उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए डोनर्स को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने की पहल की सराहना की। भोपाल (ईएमएस) । एम्स भोपाल लगातार उन्नत चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसी क्रम में एम्स भोपाल की ट्रांसप्लांट टीम और मध्य प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रत्यारोपण सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से किडनी ट्रांसप्लांट के मौजूदा पैकेज में वृद्धि करने तथा हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट को भी इस योजना में शामिल करने की बात कही। साथ ही, सीएम केयर फंड के माध्यम से प्रत्यारोपण गतिविधियों को और बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। चर्चा के दौरान अंग प्राप्ति प्रक्रिया को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया गया। इसमें संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान और उन्हें शीघ्रता से एम्स भोपाल लाकर अंग प्राप्ति की प्रक्रिया को तेज करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा, प्रत्यारोपण सर्जरी में रोबोटिक तकनीक के विस्तार पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिससे सर्जरी की सटीकता बढ़े और मरीजों को बेहतर परिणाम मिल सकें। बैठक में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि ब्रेन-डेड मरीजों से अंग प्राप्ति और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सके। उपमुख्यमंत्री ने ब्रेन-डेड अंगदाताओं को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि इससे दानदाताओं के परिवारों में सम्मान और गर्व की भावना बढ़ती है तथा समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है। ईएमएस/06मई2026