क्षेत्रीय
06-May-2026
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- केटीआर के 11 गांव में करीब 80 से अधिक कुत्तो का वैक्सीनेशन मण्डला (ईएमएस)। कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणी की मौतो ने पूरे प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गत अप्रैल माह में तीन वयस्क बाघ और चार शावको की मौत हो चुकी है। सरही परिक्षेत्र की अमाही बाघिन और उसके शावको के फेंफड़े में संक्रमण पाया गया। जिसे बचाने के लिए रेस्क्यू किया गया लेकिन चिकित्सीय टीम उसे बचा नहीं पाए। जांच में सामने आया है कि केनाइन डिस्टेंपर वायरस है जो कुत्तो के जरिए वन्यप्राणियो में तेजी से फैलता है। इसके बाद अब जाकर केटीआर से लगे हुए ग्रामीण इलाको में अभियान चलाकर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। पिछले दिनो में करीब 11 गांव कवर करते हुए 80 से अधिक कुत्ता का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार केटीआर सरही वन परिक्षेत्र के अमाही बाघिन के पूरा कुनबा खत्म होने के बाद कुत्तो से फैलने वाली बीमारी के रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन किया जा रहा है। सरही से लगे ग्रामीण इलाके डीलवारा, खटोला, मांझीपुर, सरही, कंटगा के अलावा सिलपुरा के मैदान कुत्तो का झुंड देखा गया है। रिजर्व क्षेत्र में बेरोकटोक प्रवेश और ग्रामीणो के साथ कुत्तों का जाना केनाइन डिस्टेंपर की संभावना बढ़ा दी है। इसके पहले भी केटीआर में वन्यप्राणियो की सुरक्षा को लेकर कुत्तो का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। कान्हा के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया है कि फॉरेंसिक जांच में इस वायरस के संकेत मिले हैं, तीन शावकों की मौत के बाद वन विभाग को गंभीर हालत में बाघिन और उसका एक शावक मिला था लेकिन इलाज के बाद भी इन्हें नहीं बचाया जा सका हालांकि यह पहला मामला नहीं है जिसमें यह खतरनाक वायरस बाघों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। लाइलाज बीमारी है केनाइन डिस्टेंपर वन्यजीव विशेषज्ञो का कहना है कि केनाइन डिस्टेंपर एक संक्रामक बीमारी है जो खतरनाक वायरस कुत्तों के जरिए जंगली जानवरों में फैलती है। जंगल या जंगल के आसपास घूमने वाले कुत्ते शाकाहारी वन्यजीवो पर हमला करते। इस दौरान वे अधमरे या फिर घायल हो जाते है। बाद में इन्ही वन्यप्राणी का गारा बाघ या तेंदुए करते है। जिसे यह उन तक पहुंच जाता है। यह वायरस मांसाहारी जीवों के श्वसन तंत्र, पाचन और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। सिझौरा बफर और सरही में वैक्सीनेशन कान्हा नेशनल पार्क के दायरे में करीब 300 से अधिक ग्रामीण इलाके आते है। इन क्षेत्रो में ग्रामीणो के रहवास के साथ कुत्ते भी है। जिन्हे ग्रामीण जंगल में किसी भी काम के दौरान साथ ले जाते है। इनमें खतरा भांपने और सूंघने की तीव्र शक्ति है। जिससे ग्रामीणो को वन्यप्राणी बाघ या तेंदुए की आमद की जानकारी मिल सके। सिझौरा बफर जोन और सरही वन परिक्षेत्र के ग्रामीण इलाको में वैक्सीनेशन पिछले दिनो से शुरू किया गया। केटीआर प्रबंधन की टीम ग्राम पंचायतो के सहयोग से कुत्तो का वैक्सीनेशन कर रही है। अब 11 से अधिक गांव कवर किए जा चुके है। इनका कहना है पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के निर्देशानुसार केटीआर से लगे सिझौरा और सरही वन परिक्षेत्र के ग्रामीण इलाको में वैक्सीनेशन किया जा रहा है। अब 11 से अधिक गांव कवर कर चुके है। 80 से अधिक डॉग्स को टीका लगाया जा चुका है। यह अभियान जारी रहेगा। आशीष कुमार पांडेय, सिझौरा डीएफओ ईएमएस / 06/05/2026