07-May-2026
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कुर्सी जाते ही ममता के अपने होने लगे दूर कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद ममता बनर्जी के उस इकोसिस्टम में भगदड़ मच गई है, जो पिछले एक दशक से सत्ता के केंद्र में था। जैसे ही हार सुनिश्चित हुई, मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद नौकरशाहों, अर्थशास्त्रियों और कानूनी सलाहकारों ने अपने पदों से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।ममता बनर्जी के सबसे वफादार माने जाने वाले पूर्व मुख्य सचिव और मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि 2021 में केंद्र सरकार के साथ हुए विवाद के दौरान ममता बनर्जी ने अलापन को बचाने के लिए सीधा टकराव मोल लिया था। उनके साथ ही एक अन्य पूर्व मुख्य सचिव और सलाहकार एच.के. द्विवेदी ने भी पद छोड़ दिया है। आर्थिक मोर्चे पर सरकार की नीतियों को आकार देने वाले प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष अभिरूप सरकार ने नैतिकता का हवाला देते हुए इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की हार के बाद इस पद पर बने रहने का उनका कोई अधिकार नहीं है। राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी राजभवन जाकर अपना इस्तीफा दे दिया है। किशोर दत्ता शिक्षक भर्ती घोटाले और चुनावी हिंसा जैसे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में सरकार का पक्ष रखते रहे थे। इसके अलावा, सरकार के मीडिया सलाहकार और विभिन्न अकादमियों में तैनात उन वरिष्ठ पत्रकारों ने भी किनारा कर लिया है जो सरकार का नैरेटिव सेट करने में मुख्य भूमिका निभाते थे। नबन्ना में सन्नाटा और नई सरकार की तैयारी राज्य सचिवालय नबन्ना में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है। चर्चा है कि कई प्रभावशाली आईएएस और आईपीएस अधिकारी अब नई सरकार के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश में जुट गए हैं। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए आक्रामक रुख बरकरार रखा है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया है। अब देखना यह होगा कि बिना अपने इन पुराने और भरोसेमंद सिपहसालारों के ममता बनर्जी विपक्ष में अपनी भूमिका कैसे निभाती हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/07मई 2026