राज्य
07-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने झाड़-फूंक के बहाने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने अंधविश्वास और पीड़िता की कमजोर हालत का फायदा उठाया। आस्था और अंधविश्वास की आड़ में किए गए एक बेहद शर्मनाक अपराध में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी मौलवी को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह मामला एक मासूम लड़की की कमजोर शारीरिक और मानसिक स्थिति के अलावा उसके परिवार के अंधविश्वास का फायदा उठाकर किए गए शोषण का है। जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा की बेंच ने कहा कि आरोपी ने परिवार के भरोसे और लड़की की नाजुक हालत का गलत इस्तेमाल किया। ऐसे गंभीर आरोपों में राहत देना उचित नहीं है। खासकर जब ट्रायल अंतिम चरण में पहुंच चुका हो। दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, पीड़िता लंबे समय से बीमार थी। परिवार को शक था कि उस पर जिन्न या किसी बुरी आत्मा का साया है। इसी विश्वास में वे झाड़-फूंक करने वालों के संपर्क में आए। अक्टूबर 2019 में एक परिचित के जरिए आरोपी मौलवी तक पहुंच बनाई गई। जिसने खुद को इलाज करने वाला बताया। आरोप है कि तथाकथित इलाज के दौरान आरोपी ने लड़की से आपत्तिजनक सवाल पूछे और फिर घर जाकर उसे अकेले में ठीक करने की बात कही। यहीं से शोषण का सिलसिला शुरू हुआ। आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि जिन्न को भगाने के लिए अश्लील हरकतें करनी होंगी और इसी बहाने उसने कई बार दुष्कर्म किया। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/07/मई /2026