नई दिल्ली (ईएमएस)। आधुनिक जीवनशैली में रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बनाए रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में मारीच्यासन एक प्रभावशाली योगासन है। यह न केवल रीढ़ की हड्डी के लिए अत्यंत लाभदायक है, बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों की गहराई से डिटॉक्स करने और उनके कार्य को सुधारने में भी मदद करता है। मारीच्यासन का नाम एक महान वैदिक ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया है, जिन्हें ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माना जाता है। संस्कृत भाषा में मारीच्यासन शब्द मारीच से बना है, जिसका अर्थ प्रकाश की किरण (सूर्य या चंद्रमा की किरण) होता है, और आसन का अर्थ बैठने की मुद्रा या योग की स्थिति होता है, जो इस आसन के आंतरिक शुद्धि और ज्ञान के प्रकाश से जुड़ने के प्रतीक को दर्शाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी मारीच्यासन के महत्व पर जोर दिया है, इसे एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग (मेरुदंड को मोड़ने वाला) आसन बताया है, जो ऋषि मारीचि के ज्ञान और अभ्यास को प्रतिबिंबित करता है। इस आसान को करना बेहद सरल है और इसे नियमित अभ्यास से कोई भी कर सकता है। इसका अभ्यास करने के लिए, सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इस मुद्रा में दोनों पैर सामने की ओर सीधे फैलाए रहते हैं और रीढ़ सीधी रहती है। अब अपना दाहिना घुटना मोड़ें और दाहिने पैर को अपनी बाईं जांघ के पास, फर्श पर रखें। दाहिना पैर शरीर के जितना करीब होगा, उतना बेहतर। इसके बाद, सांस लेते हुए अपनी बाईं हाथ को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए दाहिनी जांघ के बाहर रखें। फिर, अपनी कमर को सीधा रखते हुए, दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखने का प्रयास करें। यदि संभव हो, तो दोनों हाथों को पीठ के पीछे पकड़ने का प्रयास करें, जिससे ट्विस्ट और गहरा हो सके। इस मुद्रा में 5-10 गहरी सांसें लें और प्रत्येक साँस के साथ ट्विस्ट को थोड़ा और गहरा करें। फिर धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं और दूसरी तरफ (बाएं पैर और दाहिने हाथ के साथ) इसी प्रक्रिया को दोहराएं। शुरुआत में, इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे और किसी अनुभवी योग शिक्षक की देखरेख में करना उचित है। सांस पर पूरा ध्यान देना और जल्दबाजी न करना इस आसन के पूर्ण लाभ प्राप्त करने की कुंजी है। मारीच्यासन का नियमित अभ्यास शरीर को कई प्रकार के लाभ प्रदान करता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है और रीढ़ के कशेरुकाओं को सक्रिय करता है, जिससे पीठ दर्द से राहत मिलती है और पोस्चर में सुधार होता है। ट्विस्टिंग गति आंतरिक अंगों को धीरे से संपीड़ित और मालिश करती है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है। यह पेट के कई महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, किडनी, प्लीहा (स्प्लीन), पेट, अग्न्याशय (पैंक्रियास), छोटी आंत, पित्ताशय (गॉलब्लैडर) और प्रजनन तंत्र को सक्रिय करता है। परिणामस्वरूप, पाचन क्रिया में सुधार होता है, विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और शरीर की आंतरिक सफाई होती है। इसके अलावा, यह आसन तनाव को कम करने, चिंता को दूर करने और मन को शांत रखने में भी अत्यधिक प्रभावी है। नियमित योग से न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता भी बढ़ती है, जिससे शरीर लचीला और मन शांत रहता है। सही तरीके से सांस लेना और आसन करते समय मन को वर्तमान पल में केंद्रित करना इस आसन का सबसे बड़ा रहस्य है। सुदामा/ईएमएस 08 मई 2026