ज़रा हटके
09-May-2026
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कनाडा की प्रसिद्ध इमोजी लेक का अस्तित्व खत्म! क्यूबेक,(ईएमएस)। कनाडा के दक्षिण-पश्चिम क्यूबेक से प्रकृति के विनाश की एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है। अपनी अनूठी बनावट के लिए दुनिया भर में मशहूर लेक रौज, जिसे लोग प्यार से इमोजी लेक कहते थे, अब पूरी तरह सूख चुकी है। यह झील ऊपर से देखने पर दो अन्य छोटी झीलों के साथ मिलकर एक हैरान चेहरे जैसा आकार बनाती थी, जो पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र थी। मई 2025 में स्थानीय समुदाय के लोगों ने पाया कि झील का पानी रहस्यमय तरीके से गायब हो चुका है और वहां अब केवल कीचड़ व मरी हुई मछलियों का ढेर बचा है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि झील का पूर्वी किनारा भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण टूट गया, जिससे झील का पूरा पानी एक झटके में बाहर निकल गया। इस प्रलयकारी बहाव ने रास्ते में आने वाले छोटे तालाबों को भी नष्ट कर दिया। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि झील का पानी लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित डोडा लेक में जा मिला, जिससे उस झील का साफ पानी भी पूरी तरह मटमैला हो गया है। विशेषज्ञों ने इसे आउटबर्स्ट फ्लड करार दिया है, जो आमतौर पर केवल ग्लेशियर वाली झीलों में देखा जाता है। लेक रौज जैसी साधारण झील का इस तरह फटना एक अत्यंत दुर्लभ और चिंताजनक घटना है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तबाही के पीछे मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन मुख्य कारण हैं। साल 2019 और 2023 में कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग ने जमीन की ऊपरी परत को बेहद कमजोर कर दिया था। जली हुई मिट्टी पानी सोखने की क्षमता खो देती है, जिससे झील के किनारों पर दबाव बढ़ गया। इसके साथ ही, इलाके में बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई ने आग में घी का काम किया। पेड़ों की जड़ों के बिना मिट्टी अपनी पकड़ खो बैठी और भारी बर्फबारी के बाद अचानक पिघली बर्फ के दबाव को झील के किनारे सहन नहीं कर पाए। सरकारी हाइड्रोलॉजिस्ट के अनुसार, क्यूबेक का यह संवेदनशील इलाका अभी भी भौगोलिक बदलावों के दौर से गुजर रहा है, लेकिन इंसानी गतिविधियों ने इस प्रक्रिया को खतरनाक रूप से तेज कर दिया है। इस घटना से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को अपूरणीय क्षति हुई है। हजारों मछलियों की मौत और जलीय जीवों के आवास नष्ट होने से स्थानीय शिकारी और मछुआरे अपनी आजीविका को लेकर गहरे संकट में हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, इसलिए अब अन्य झीलों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। वीरेंद्र/ईएमएस 09 मई 2026