लंदन (ईएमएस)। इंग्लैंड के सोलिहुल की रहने वाली हीथर, ब्रिटेन के मशहूर ‘जुरासिक कोस्ट’ पर जीवाश्मों की तलाश में निकली थीं, जो लाइम रेजिस म्यूजियम द्वारा आयोजित एक गाइडेड फॉसिल वॉक का हिस्सा थीं। हीथर को समुद्र तट पर एक अजीब सी चीज दिखी। उन्होंने समुद्र के बहाव के साथ बहकर आया लकड़ी का एक मामूली टुकड़ा समझा, जिसमें कुछ नुकीली कीलें निकली हुई थीं। जब हीथर उसे ध्यान से देखा, तो उसकी असलियत सामने आई। यह कोई साधारण लकड़ी नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने समुद्री मगरमच्छों में से एक का जीवाश्म था, जो करीब 20 करोड़ साल से भी ज़्यादा पुराना है। हीथर साल्ट के लिए यह खोज किसी लॉटरी लगने से कम नहीं थी, क्योंकि उन्होंने अनजाने में इतिहास के पन्नों में दफन एक बेहद दुर्लभ शिकारी का राज खोल दिया था। हीथर ने तुरंत अपने गाइड और जीवाश्म वैज्ञानिक केसी रिच को इसकी जानकारी दी। केसी रिच ने जब उसे देखा, तो वे अपनी खुशी नहीं रोक पाए। उन्होंने बताया, “एक फील्ड पैलियोन्टोलॉजिस्ट के तौर पर यही वो पल होते हैं, जिनके लिए हम जीते हैं। लोगों को बुनियादी चीजें सिखाकर हम उन्हें अपनी खुद की खोज करने का मौका देते हैं और कभी-कभी वे ऐसी चीजें ढूंढ लेते हैं जो विज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।” एक्सपर्ट्स ने पुष्टि की है कि यह जीवाश्म ‘चार्मौथ क्रोकोडाइल’ के नाम से मशहूर ‘टर्नरसुचस हिंग्लेया’ प्रजाति का है। यह अवशेष उस जीव के ऊपरी जबड़े की हड्डी का हिस्सा है। इस खोज की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनिया में अब तक इस प्रजाति के केवल 11 जीवाश्म ही मिले हैं। यह समुद्री मगरमच्छ करीब 20 करोड़ साल पहले धरती पर राज करता था और आधुनिक मगरमच्छों का पूर्वज माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव करीब दो मीटर लंबा होता था और इसका थूथन काफी पतला था, जो मछलियां पकड़ने के लिए सबसे सटीक हथियार था। यह अपना ज़्यादातर समय पानी में बिताता था और केवल अंडे देने के लिए ही जमीन पर आता था। यह जीवाश्म न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उस काल के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में भी नई जानकारी देता है जब डायनासोरों का दौर शुरू ही हुआ था। हीथर की इस खोज ने साबित कर दिया कि कभी-कभी सबसे बड़े राज आपके पैरों के ठीक नीचे दफन होते हैं, बस उन्हें पहचानने वाली पारखी नजर चाहिए। इस जीवाश्म की असल पहचान होने के बाद इसे सहेजने और संरक्षित करने का काम शुरू किया गया। अब यह दुर्लभ अवशेष लाइम रेजिस म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है, जहां इसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग पहुंच रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 09 मई 2026