खेल
09-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में अभी तक क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के स्टार खिलाड़ियों को पहचान नहीं मिली है। यह आवाज शीर्ष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने भी उठाई है। इन खिलाड़ियों का कहना है कि बड़े टूर्नामेंट जीतने के बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा जो मिलना चाहिये था। थॉमस कप विजेता युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी और अनुभवी खिलाड़ी एचएस प्रणय का कहना है कि बड़े टूर्नोमेंट जीतने के बाद भी उन्हें कोई पहचानता तक नहीं है। जिससे उनको निराशा का अनुभव होता है। इन खिला़ड़ियों के अनुसार जब वह थॉमस कप जीतने जीतकर वापस आये तो भी किसी ने उनपर ध्यान नहीं दिया। सात्विकसाईराज ने कहा कि जर्मनी से वापसी लौटी टीम के लिए हैदराबाद सवाई अड्डे पर कोई नहीं था। यहां तक कि किसी ने भी उन्हें पहचाना नहीं और न ही जीत के बारे में पूछा। सभी का व्यवहार अजनबी जैसा था। जब वह उतरे तो सभी अपने-अपने काम करते रहे। इससे उन्हें उपेक्षा का अनुभव हुआ। इससे अंदाजा होता है कि कि राष्ट्रीय स्तर की खेल उपलब्धियों को भी लोग नहीं जानते। एक अन्य खिलाड़ी चिराग शेट्टी भी इससे सहमत दिखे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को किसी भव्य स्वागत की उम्मीद नहीं रहती पर कम से कम उनके प्रदर्शन और कड़ी मेहनत की सराहना तो होनी चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार और खेल संस्थाएं अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं, लेकिन देश में एक व्यापक खेल संस्कृति और जागरूकता की कमी अब भी साफ नजर आती है, जिसके कारण अन्य खेलों के मुकाबले बैडमिंटन जैसी उपलब्धियों को कम आंका जाता है। वहीं एचएस प्रणय ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने जोर दिया कि थॉमस कप, जिसे वैश्विक स्तर पर एक विश्व कप जैसी पहचान मिलनी चाहिए, को उतना महत्व नहीं मिलता जितनी अन्य बड़े खेल आयोजनों को मिलता है। उनका मानना है कि इस टूर्नामेंट के महत्व को लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है ताकि खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकें। गिरजा/ईएमएस 09मई 2026