राष्ट्रीय
09-May-2026
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लापता विधायक के दावों से गरमाई सियासत चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध अब एक बेहद पेचीदा मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा होने के कारण अब राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। आरोप-प्रत्यारोप, विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त और फर्जी समर्थन पत्रों के दावों ने चेन्नई के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। गौरतलब है कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन बहुमत के आंकड़े को लेकर अब भी तस्वीर धुंधली है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई भी दल 234 सदस्यीय विधानसभा में 118 विधायकों का ठोस समर्थन साबित नहीं करता, तब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा। हालिया विधानसभा चुनावों में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन वह बहुमत से दूर रह गई। टीवीके ने कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ गठबंधन कर अपना आंकड़ा 117 तक पहुंचाया, लेकिन तकनीकी पेंच तब फंस गया जब यह स्पष्ट हुआ कि विजय को दो सीटों पर मिली जीत के कारण एक सीट छोड़नी होगी, जिससे प्रभावी संख्या फिर कम हो सकती है। शुक्रवार देर रात यह संकट उस समय और गहरा गया जब एएमएमके महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की और टीवीके पर हॉर्स ट्रेडिंग के गंभीर आरोप लगाए। विवाद का केंद्र एएमएमके-समर्थित विधायक एस. कामराज बने, जिनके बारे में दावा किया गया था कि उन्होंने टीवीके को समर्थन दिया है। दिनाकरन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल को व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी समर्थन पत्र भेजे गए और उनके विधायक को डराया-धमकाया गया। हालांकि, कुछ देर बाद कामराज ने खुद सामने आकर समर्थन के दावे को खारिज कर दिया और अपने हस्ताक्षर के दुरुपयोग की बात कही। जवाबी कार्रवाई में टीवीके ने एक वीडियो जारी कर आरोपों को निराधार बताया है, जिसमें विधायक स्वेच्छा से हस्ताक्षर करते दिख रहे हैं। टीवीके नेताओं का कहना है कि उनकी सरकार बनने से रोकने के लिए विपक्षी दल साजिश रच रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 48 घंटों के भीतर बहुमत का स्पष्ट प्रमाण पेश नहीं किया गया, तो राज्यपाल केंद्र को संवैधानिक संकट की रिपोर्ट भेज सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना तय माना जा रहा है। फिलहाल, सभी की निगाहें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/09मई 2026