क्षेत्रीय
09-May-2026
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- “क्या चैट जीपीटी से बन रहे प्रश्नपत्र?” गुना (ईएमएस)। जिले की क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय एक बार फिर अपनी परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला स्नातक परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों से जुड़ा है, जहां बीकॉम प्रथम वर्ष के वित्तीय लेखांकन विषय के पेपर ने छात्रों और शिक्षा जगत के लोगों को चौंका दिया। आरोप है कि पांच इकाईयों वाले सिलेबस में से लगभग पूरा प्रश्नपत्र केवल पहली इकाई और दूसरी इकाई के कुछ हिस्सों से ही बना दिया गया, जबकि बाकी लगभग पौने चार इकाईयों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। अब छात्र खुलकर यह सवाल उठा रहे हैं कि कहीं विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म “चैट जीपीटी” का इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा। जानकारी के अनुसार बीकॉम प्रथम वर्ष के वित्तीय लेखांकन विषय के 70 अंकों के प्रश्नपत्र में नियमानुसार पांचों इकाईयों से लगभग 14-14 अंकों के प्रश्न पूछे जाने थे। विषय के सिलेबस में प्राचीन भारतीय परंपरा में संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का सिद्धांत, सामग्री लागत निर्धारण, श्रम लागत, उपरिव्यय एवं इकाई लागत, ठेका लागत तथा परिचालन लागत लेखांकन जैसी पांच अलग-अलग इकाईयां शामिल थीं। लेकिन परीक्षा में छात्रों को जो प्रश्नपत्र मिला, उसमें अधिकांश प्रश्न केवल पहली इकाई से पूछे गए और कुछ सवाल दूसरी इकाई से थे। शेष इकाईयों से कोई उल्लेखनीय प्रश्न नहीं लिया गया। इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब एक छात्र ने दावा किया कि उसने चैट जीपीटी पर विषय की पांचों इकाईयों का विवरण डालकर प्रश्नपत्र तैयार करने को कहा। छात्र का आरोप है कि एआई द्वारा तैयार किया गया प्रश्नपत्र लगभग उसी तरह का निकला जैसा परीक्षा में बांटा गया था। खास बात यह रही कि उसमें भी केवल शुरुआती इकाईयों से ही प्रश्न शामिल थे। इसके बाद छात्रों के बीच चर्चा तेज हो गई कि कहीं विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के प्रश्नपत्र एआई के भरोसे तो नहीं बनाए जा रहे। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय द्वारा प्रश्नपत्र तैयार करने और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन जैसे कार्य निजी एजेंसी को सौंपे गए हैं। बताया जा रहा है कि यह एजेंसी उत्तर प्रदेश की है और वही परीक्षा संबंधी कई जिम्मेदारियां संभाल रही है। ऐसे में शिक्षा जगत के लोगों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र निर्माण में गंभीरता नहीं बरती गई तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा। छात्रों का कहना है कि जब पेपर एक-दो इकाईयों से ही बनना है तो फिर पूरी पांच या छह इकाईयों की पढ़ाई करने का क्या औचित्य रह जाता है। पीजी कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे एक छात्र ने बताया कि क्रांतिवीर तात्याटोपे विवि का बीकॉम प्रथम वर्ष का फायनेंसियल एकाउंटिंग का पेपर था। पेपर बहुत ही आसान था। पढ़ाया तो पांच यूनिट दी थी लेकिन पेपर एक ही यूनिट का आया। हमें तो बताया गया कि हर इकाई में से 14 नवंर का प्रश्नपत्र पूछा जाएगा लेकिन आया एक ही यूनिट से। ऐसा लग रहा है एआई चैट जीपीटी से पेपर बनाया है। इनका कहना है “इस बारे में छात्र मेरे पास प्रमाण सहित लेकर आएं तो हम जांच करेंगे और पेपर बनाने वाली एजेंसी को ब्लेक लिस्ट करेंगे।चूंकि पांचों यूनिट मिलती जुलती रहती हैं कभी ऐसा हो जाता है कि एक दो यूनिट से पेपर बन जाता है। फिर भी छात्र हमारे पास प्रमाण लेकर आते हैं तो हम प्राचार्यों के साथ इस पर विचार करके पेपर बनाने वालों पर कार्रवाई करेंगे।” प्रभात चौधरी, परीक्षा नियंत्रक, क्रांतिवीर तात्याटोपे विवि गुना - सीताराम नाटानी