नई दिल्ली (ईएमएस)। नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली की सड़कों पर अपराध करने वाला हर नाबालिग सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की कहानी भी है। जिन बच्चों के हाथ में कलम-किताब होनी चाहिए थी, वे चाकू और तमंचा लिए चोरी, स्नेचिंग और गंभीर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। इन्हें रोकना तो दूर, अपराध से बचाने के लिए बनाई गई पुलिस की योजनाएं भी खुद ही दम तोड़ती नजर आ रहीं हैं। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में स्थिति चिंताजनक है। 2023 के 31,365 मामलों से बढ़कर 2024 में 34,878 मामले दर्ज हुए। दिल्ली के हालात भी कुछ अलग नहीं हैं। 2024 में दिल्ली में 2306 किशोर अपराध के मामले दर्ज हुए, जो किसी भी मेट्रो शहर से ज्यादा हैं। ऐसे में सवाल यही है, जिन योजनाओं से बच्चों को अपराध से दूर करना था, वे आखिर असरदार क्यों नहीं बन पाईं। ...../नई दिल्ली/ईएमएस/09/ मई/2026