- टिकट एक, दावेदार अनेक, महत्वाकांक्षा जगाकर खुद ही पैदा कर रहे हैं बगावत के बीज - बैठक में खुलकर सामने आई पार्टी की गुटबाजी - मंच से पार्टी नेताओं को पूर्व मंत्री ने दी नसीहत, गुटबाजी और भीतरघात पर जताई चिंता बालाघाट (ईएमएस). प्रदेश के पूर्व मंत्री अजय सिंह राहुल भैया ने अपनी ही पार्टी की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि नेता खुद ही टिकट की महत्वाकांक्षाएं जगा कर संगठन के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं। कांग्रेस में ‘टिकट की राजनीति’ पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का बड़ा बयान बालाघाट प्रवास के दौरान आया। उन्होंने कहा कि टिकट एक, दावेदार अनेक, ऐसे में असंतोष में आकर भीतरघात होता है। शुक्रवार को देर रात बालाघाट पहुंचे अजय सिंह राहुल भैया ने अपने प्रवास के दौरान विधायक, पूर्व विधायक और पार्टी नेताओं से मुलाकात की। जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सिंह सरसवार के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा के साथ-साथ पार्टी के भीतर की खामियां भी खुलकर सामने आईं। कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं के बीच सरकार में भागीदारी न मिलने का दर्द झलका, वहीं गुटबाजी की स्थिति भी परोक्ष रूप से उजागर हुई। कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं विधायक संजय उईके, वारासिवनी विधायक विवेक पटेल, बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे, पूर्व विधायक अशोक सिंह सरसवार, पूर्व उपाध्यक्ष मप्र विधानसभा हिना कावरे, कांग्रेस नेत्री पुष्पा बिसेन, संगठन महासचिव शफकत खान, शहर अध्यक्ष श्याम पंजवानी, अनूप सिंह बैस सहित वरिष्ठ कांग्रेसी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। सत्ता से बाहर रहने का दर्द छलका कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नेताओं की भावनाएं भी खुलकर सामने आईं। लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का दर्द उनके बयानों में साफ झलका। नेताओं ने स्वीकार किया कि सरकार में नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे संगठन की पकड़ भी कमजोर पड़ती है। हालांकि, अजय सिंह ने इस असंतोष को संतुलित करने की कोशिश करते हुए एकजुटता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर काम करें, तो वर्ष 2028 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी संभव है। बयान से खुली पार्टी की अंदरुनी परतें बालाघाट में पूर्व मंत्री अजय सिंह का बयान कांग्रेस की मौजूदा अंदरूनी स्थिति की परतें खोलता नजर आता है। उनके संदेश में जहां एक ओर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती की बात है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ झलकता है कि पार्टी अभी गुटबाजी, टिकट की खींचतान और नेतृत्व के भीतर असंतोष जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। कुल मिलाकर, यह बयान कांग्रेस के लिए एक चेतावनी और उम्मीद दोनों का संकेत देता है—चेतावनी इस बात की कि अंदरूनी कलह पार्टी को कमजोर कर सकती है, और उम्मीद इस रूप में कि एकजुटता से भविष्य की राह अभी भी बनाई जा सकती है। जिन्हें टिकट नहीं मिलता वे अपनाते हैं बगावती तेवर-अजय सिंह अपने संबोधन में अजय सिंह ने दो टूक कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि नेता खुद ही कई लोगों की टिकट की उम्मीदें जगा देते हैं। उन्होंने कहा, हम कहते हैं—तुम ही टिकट ले लो, मैं तुम्हारे लिए प्रयास करूंगा और चुनाव आते-आते हर विधानसभा में 7 से 20 दावेदार खड़े हो जाते हैं। उन्होंने चेताया कि जब टिकट केवल एक को मिलता है, तो बाकी दावेदार असंतोष में आकर भीतरघात की राह पकड़ लेते हैं। जिसे टिकट नहीं मिलता, वह बगावती तेवर अपना लेते हैं। अजय सिंह ने नेताओं से संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी कार्यकर्ता या नेता की झूठी महत्वाकांक्षा न जगाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिसके किस्मत में होगी, उसे टिकट मिल जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते मनमुटाव को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि नेता अपने ही कार्यकर्ताओं को सही दिशा नहीं दे पा रहे हैं, जिसके कारण नीचे स्तर पर ही टकराव की स्थिति बन रही है। हम अपने ही लोगों को ठीक से समझाते नहीं हैं, हमारे नीचे काम करने वालों में ही मनमुटाव पैदा हो जाता है। उन्होंने चेताया कि अगर इसे समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो यही बड़ा विवाद बन जाता है। भानेश साकुरे / 09 मई 2026