नई दिल्ली (ईएमएस)। यूपी के गोंडा जिले का प्राचीन बालक नाथ शिवलिंग लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। जिले के विकासखंड झंझरी में स्थित यह मंदिर केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि इससे जुड़ी रहस्यमयी और ऐतिहासिक मान्यताएं भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर को लेकर सबसे चर्चित मान्यता मुगल शासक औरंगजेब से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अपने शासनकाल के दौरान औरंगजेब ने कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। इसी क्रम में उसने बालक नाथ शिवलिंग को भी हटाने और तोड़ने का प्रयास कराया था। हालांकि स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव की शक्ति के आगे उसके सभी प्रयास विफल हो गए। बताया जाता है कि आज भी शिवलिंग पर कुछ निशान मौजूद हैं, जिन्हें लोग उस हमले के प्रमाण के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि यह कहानी आज भी श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। स्थानीय निवासी शिवपूजन सिंह बताते हैं कि यह शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। उनका कहना है कि इसकी स्थापना किसी व्यक्ति द्वारा नहीं की गई थी, बल्कि यह अपने आप प्रकट हुआ था। इसी कारण इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर स्वीकार होती है और भगवान शिव भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सोमवार और शुक्रवार के दिन यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं सावन महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले भक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। शिवकुमार गिरी बताते हैं कि इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दूध से रुद्राभिषेक करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। बालक नाथ शिवलिंग आज भी गोंडा जिले की धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक बना हुआ है। सुदामा/ईएमएस 11 मई 2026