पटना, (ईएमएस)। बिहार सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए “ऑन-डिमांड वेतन/पेंशन अग्रिम योजना” लागू करने का फैसला किया है। इस नई डिजिटल वित्तीय सुविधा के तहत अब कर्मचारियों और रिटायर्ड पेंशनभोगियों को आकस्मिक जरूरतों के लिए एजेंटों या निजी साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पात्र कर्मी अपने वेतन या पेंशन का अधिकतम 30 गुना तक ऋण प्राप्त कर सकेंगे। योजना के तहत कर्मचारियों को अल्पकालिक वेतन अग्रिम और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। पूरी प्रक्रिया को 100 प्रतिशत डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा, ताकि लोन लेने की प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और आसान हो सके। इस योजना का नोडल विभाग वित्त विभाग होगा और टेंडर प्रक्रिया के जरिए योग्य बैंकों का चयन किया जाएगा। सरकार के अनुसार, अचानक आर्थिक जरूरत पड़ने पर कई कर्मचारी निजी साहूकारों या अनियमित फाइनेंस कंपनियों के जाल में फंस जाते हैं, जहां उन्हें भारी ब्याज और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था तैयार की गई है। इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो 24×7 उपलब्ध रहेगा। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार इसे “शून्य लागत एवं शून्य दायित्व मॉडल” पर लागू करेगी। ऋण से जुड़े जोखिम, जैसे बकाया राशि की वसूली नहीं होना, पूरी तरह संबंधित बैंक वहन करेंगे, जबकि सरकार केवल गारंटर की भूमिका निभाएगी। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को 60 दिनों तक के लिए वेतन अग्रिम मिलेगा। यदि कर्मचारी उसी या अगले वेतन चक्र में राशि लौटा देते हैं, तो उन पर किसी प्रकार का ब्याज या प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2 महीने से लेकर 60 महीने तक की अवधि के लिए दीर्घकालिक ऋण भी उपलब्ध रहेगा। मासिक ईएमआई कर्मचारी के शुद्ध वेतन या पेंशन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, ताकि घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। सरकार इस पूरी प्रणाली को राज्य के सीएफएमएस और एचआरएमएस पोर्टल से जोड़ेगी, जिससे लोन स्वीकृति और ईएमआई कटौती की प्रक्रिया स्वतः संचालित होगी। कर्मचारियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी हो सकेगी। वित्त विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों और सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के अनुरूप लागू की जाएगी। चयनित बैंक ग्राहकों को पहले ही सभी नियम, शर्तें और शुल्क की जानकारी देंगे, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे। गौरतलब है कि राज्य मंत्रिपरिषद ने 6 मई 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। सरकार का मानना है कि यह पहल कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक शोषण से बचाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। संतोष झा- ११ मई/२०२६/ईएमएस