पटना, (ईएमएस)। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग ने राज्यभर में बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया है कि वे राज्य के लगभग 45 हजार ग्रामीण पुल-पुलियों की विशेष तकनीकी जांच कराएं, ताकि बारिश के मौसम में किसी प्रकार की दुर्घटना, जलजमाव या आवागमन बाधित होने जैसी समस्या उत्पन्न न हो। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसून के दौरान किसी भी पुल या पुलिया में तकनीकी खराबी न आए और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह सुचारु बनी रहे। अधिकारियों के अनुसार बारिश के समय कई जगहों पर पुलों के आसपास पानी जमा हो जाता है, जिससे संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होता है और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। जांच अभियान के दौरान अभियंता पुलों और पुलियों के गर्डर, स्लैब, पिलर, ज्वाइंट और जल निकासी प्रणाली का विस्तृत निरीक्षण करेंगे। जहां कहीं भी गाद, मिट्टी या अन्य अवरोध पाए जाएंगे, वहां तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुलों से पानी की निकासी पूरी तरह बाधारहित रहनी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान पानी का दबाव संरचनाओं पर न बढ़े। इसके साथ ही सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अगले एक महीने के भीतर अपलोड करें। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी पुल-पुलियों की स्थिति का सही आकलन हो सके। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक उत्तर बिहार के जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में हर साल बाढ़ का खतरा अधिक रहता है। यहां ग्रामीण पुल-पुलियों की संख्या भी ज्यादा है। इसी कारण इन इलाकों में अतिरिक्त निगरानी, समय पर मरम्मत और नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हाल के वर्षों में जिन पुलों का निर्माण निजी निर्माण कंपनियों द्वारा किया गया है, उनकी देखरेख और सफाई की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों को सौंपी गई है। वहीं पुराने पुल-पुलियों की मरम्मत और निगरानी का कार्य कार्यपालक अभियंताओं की देखरेख में कराया जाएगा। यदि किसी पुल में क्षति या मरम्मत की जरूरत पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि बिहार में करीब 1 लाख 19 हजार किलोमीटर लंबा ग्रामीण सड़क नेटवर्क मौजूद है, जिस पर बड़ी संख्या में पुल-पुलियों का निर्माण किया गया है। विभाग के अनुसार अब नए पुल सात मीटर चौड़े बनाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में बढ़ते यातायात और जलप्रवाह के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। सरकार का मानना है कि समय रहते जांच, निगरानी और मरम्मत कार्य पूरा कर लेने से मानसून और बाढ़ के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बाधित होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। संतोष झा- ११ मई/२०२६/ईएमएस