बिलासपुर (ईएमएस)। अग्रज नाट्य दल की ओर से आयोजित 45 दिवसीय अभिनय एवं रंगमंच प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। कार्यशाला में बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आगामी 45 दिनों तक प्रतिभागियों को अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, भावाभिव्यक्ति और नाट्य संगीत का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सशक्त कला है। यह व्यक्तित्व विकास के साथ आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को भी मजबूत करता है। अग्रज नाट्य दल के वरिष्ठ सदस्य मोहन देव पुजारी ने कहा कि संस्था पिछले 33 वर्षों से लगातार नई प्रतिभाओं को मंच दे रही है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कई कलाकार आज छत्तीसगढ़ी फिल्मों और अन्य फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके हैं। संज्ञा टंडन ने योगेश स्मृति नाटक महोत्सव की जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन संस्था के संस्थापक सदस्य रहे योगेश पाण्डेय की स्मृति में हर वर्ष आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच कलाकारों को सामाजिक रूप से जागरूक बनाने का भी कार्य करता है। डॉ. बी.के. गुप्ता ने कहा कि नाट्य कला व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास पैदा करती है और जीवन में अनुशासन सिखाती है। वहीं मोहम्मद रफीक ने अभिनय को सबसे कठिन लेकिन प्रभावशाली कला बताते हुए कहा कि अभिनय जीवन को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। चम्पा भट्टाचार्जी ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को अभिनय के साथ नाट्य संगीत और मंचीय प्रस्तुति का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शत्रुघ्न जैसवानी ने कहा कि कार्यशाला का अनुभव प्रतिभागियों के भविष्य में काफी उपयोगी साबित होगा। सुनील चिपड़े ने कहा कि अग्रज नाट्य दल परिवार की तरह कार्य करता है, जहां कलाकारों को सीखने और आगे बढऩे का सकारात्मक वातावरण मिलता है। - 11 मई 2026