नई दिल्ली (ईएमएस)। आखिर प्रकृति ने इंसान की नाक को दो हिस्सों में क्यों बांटा। इंसान के शरीर की बनावट को लेकर अक्सर इस तरह के सवाल मन में आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे शरीर की एक बेहद जटिल और अद्भुत प्रक्रिया काम करती है। विज्ञान में इसे “ नाशिका चक्र” कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत दोनों नथुने एक साथ बराबर काम नहीं करते, बल्कि बारी-बारी से सक्रिय रहते हैं। कुछ घंटों तक एक नथुना ज्यादा सक्रिय रहता है और दूसरा अपेक्षाकृत आराम की स्थिति में होता है। फिर कुछ समय बाद उनकी भूमिकाएं बदल जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह व्यवस्था शरीर को अधिक कुशल तरीके से सांस लेने में मदद करती है। इसके अलावा यह हमारी सूंघने की क्षमता को भी बेहतर बनाती है। आमतौर पर लोगों को इस प्रक्रिया का अहसास नहीं होता, लेकिन दिन-रात नथुनों के बीच यह बदलाव लगातार चलता रहता है। मानव शरीर प्राकृतिक रूप से नाक से सांस लेने के लिए बना है। मुंह से सांस लेना आमतौर पर तब शुरू होता है जब शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जैसे व्यायाम के दौरान या फिर नाक बंद होने पर। नाक केवल हवा अंदर लेने का रास्ता नहीं है, बल्कि यह फेफड़ों के लिए एक फिल्टर और तैयारी केंद्र की तरह काम करती है। जब हवा नाक से गुजरती है, तो वह साफ होती है, गर्म होती है और उसमें नमी मिलाई जाती है। इसके बाद ही वह फेफड़ों तक पहुंचती है। अगर यह प्रक्रिया न हो, तो ठंडी और सूखी हवा सीधे फेफड़ों में पहुंचकर श्वसन तंत्र में जलन और सूजन पैदा कर सकती है। वैज्ञानिक बताते हैं कि दो नथुने होने से यह काम अधिक प्रभावी तरीके से हो पाता है। एक नथुना ज्यादा हवा को संभालता है, जबकि दूसरा आराम की स्थिति में रहकर नमी और संतुलन बनाए रखता है। यही वजह है कि दोनों नथुने एक साथ समान रूप से काम नहीं करते। नाक का संबंध केवल सांस लेने से ही नहीं, बल्कि सूंघने की क्षमता से भी जुड़ा है। हर सांस के साथ गंध के सूक्ष्म कण नाक के भीतर पहुंचते हैं और मस्तिष्क तक संकेत भेजते हैं। जब किसी एक नथुने से हवा धीरे गुजरती है, तो गंध के कणों को घुलने के लिए ज्यादा समय मिलता है, जिससे कुछ खास गंध आसानी से पहचानी जाती हैं। वहीं दूसरे नथुने से तेज हवा बहने पर अलग तरह की गंधों का पता लगाने में मदद मिलती है। दो नथुनों की यह व्यवस्था बीमारी के समय भी शरीर की मदद करती है। सर्दी-जुकाम होने पर अक्सर एक नथुना ज्यादा बंद हो जाता है। सुदामा/ईएमएस 12 मई 2026