क्षेत्रीय
12-May-2026
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मुंगेली(ईएमएस)। जिले के नगर पंचायत जरहागांव में अवैध शराब बिक्री और शराब दुकानों की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दल के पदाधिकारियों ने थाना पहुंचकर ज्ञापन सौंपते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। नगर पंचायत अध्यक्ष रूपाली वेदप्रकाश कश्यप, उपाध्यक्ष मनोज कश्यप और पार्षदों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार बेखौफ चल रहा है, जिससे सामाजिक माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि पुलिस और प्रशासन अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने में असमर्थ हैं, तो फिर सभी दुकानदारों को शराब बिक्री की खुली अनुमति दे दी जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। ज्ञापन के बाद अब शराब दुकानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शराब दुकानों से पहले कथित “कोचियों” को शराब उपलब्ध कराई जाती है, जो बाद में उसे ऊंचे दामों पर बेचते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दावा है कि कुछ लोग एक बार में बड़ी मात्रा में शराब खरीदकर उसे जमा करते हैं और फिर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में 80 रुपये की शराब 120 से 150 रुपये तक बेचते हैं। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कोचियों के लिए अलग व्यवस्था की जाती है, जहां उन्हें अलग काउंटर या अलग व्यवस्था के तहत शराब दी जाती है, जबकि आम नागरिकों को लंबी कतार में लगना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अवैध शराब की आसान उपलब्धता के कारण युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। महिलाओं में भी इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। देशी शराब दुकान के सुपरवाइजर रमेश साहू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शासन के नियमों के अनुसार एक व्यक्ति को एक बार में निर्धारित मात्रा तक ही शराब दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुकान स्तर पर यह पहचान कर पाना संभव नहीं होता कि कौन कोचीया है और कौन सामान्य ग्राहक। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। थाना स्तर पर यह कहा गया है कि अवैध शराब कारोबार में जो भी लोग शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि किसी भी अवैध गतिविधि को राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण न दिया जाए, ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके। सत्यप्रकाश(ईएमएस)12 मई 2026