खेल
13-May-2026
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खिलाड़ियों को टूर्नामेंट के कुल राजस्व का बड़ा हिस्सा मिले रोम (ईएमएस)। टेनिस जगत में खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि बढ़ाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। अब इस अभियान का नेतृत्व कर रही अमेरिकी महिला टेनिस खिलाड़ी जेसिका पेगुला ने कहा है कि खिलाड़ी अब अपनी इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। पेगुला ने कहा कि यह सही समय है जब खिलाड़ियों को टूर्नामेंट के कुल राजस्व में एक बड़ा मिलना चाहिए। वहीं इससे पहले विश्व नंबर-1 पुरुष टेनिस खिलाड़ी यानिक सिनर और महिला वर्ग की नंबर-1 खिलाड़ी एरीना सबालेंका ने भी कहा था कि पुरस्कार राशि बढ़ायी जानी चाहिये। गई है। पेगुला खिलाड़ियों को इस मामले को लेकर एक मंच पर लाने का प्रयास भी कर रही हैं। । उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों से इस मामले में सीधे बात करने और उन्हें एकसाथ लाने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है। पेगुला ने कहा, मैं किसी भी खिलाड़ी के पास जाकर पूछ सकती हूं कि क्या वह इस मामले में हमसे सहमत है या नहीं । साथ ही कहा कि कुछ खिलाड़ी शायद इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी पूरी तरह से समर्थन में हैं। वह पुरुष और महिला दोनों वर्गों के खिलाड़ियों से लगातार संपर्क कर रही हैं और उन्हें इस अभियान में शामिल कर रही हैं। पेगुला ने संकेत दिया कि अन्य प्रमुख पेशेवर खेलों की तुलना में टेनिस खिलाड़ियों को उनके योगदान के बदले काफी कम हिस्सा मिलता है। उन्होंने एनएफएल (नेशनल फुटबॉल लीग) और एनएचएल (नेशनल हॉकी लीग) जैसी लीगों का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें खिलाड़ियों को लीग के कुल राजस्व का लगभग 50 फीसदी हिस्सा मिलता है। इसके विपरीत, अधिकतर टेनिस टूर्नामेंटों में खिलाड़ियों का यह हिस्सा बहुत कम रहता है। खिलाड़ियों द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, फ्रेंच ओपन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भी खिलाड़ियों को कुल राजस्व का 14.9 फीसदी से भी कम हिस्सा मिलता है, जो कि अन्य खेलों की तुलना में एक बड़ा अंतर है। वहीं पिछले सप्ताह बेलारुस की, एरीना सबालेंका ने भी इस मामले को उठाया था और कहा था कि यदि खिलाड़ियों को उनका उचित हिस्सा नहीं मिलता, तो उन्हें बहिष्कार जैसे कड़े कदमों पर भी विचार करना चाहिए। वहीं यानिक सिनर ने टूर्नामेंट आयोजकों पर खिलाड़ियों के प्रति सम्मान की कमी का आरोप लगाया था। पेगुला ने इन दोनों शीर्ष खिलाड़ियों के समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि जब दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी किसी मुद्दे पर खुलकर बोलते हैं, तो उनकी बात को नजरअंदाज करना असंभव हो जाता है। उनका समर्थन इस अभियान को एक मजबूत आवाज देता है। गिरजा/ईएमएस 13 मई 2026