राष्ट्रीय
14-May-2026


राजनीति में आने से किया था इनकार, विदेशी नागरिक नहीं लड़ सकता चुनाव चंडीगढ़,(ईएमएस)। मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के राज का खुलासा हुआ है। हाल ही में उन्होंने खुद को राजनीति से दूर रखने की बात कही थी, जब उनसे पंजाब में चुनाव लड़ने को लेकर पूछा गया तो दोसांझ ने कहा था कि वे राजनीति में नहीं आना चाहते हैं उन्होंने राजनीति से दूरी क्यों बनाई है, अब यह राज खुल गया है। हाल ही में दोसांझ को राजनीति में आने का प्रस्ताव भी दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। उनके राजनीति में न आने की वजह अब सामने आ चुकी है। दरअसल दिलजीत दोसांझ भारतीय नागरिक ही नहीं अमेरिकी के भी नागरिक हैं, ऐसे में वे विदेशी नागरिक होने के नाते भारत के संविधान के मुताबिक विधानसभा या कार्यपालिका का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि दोसांझ ने 2022 में ही अमेरिकी नागरिकता ले ली है। वह अब भारतीय नागरिक नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दिलजीत दोसांझ सितंबर 2021 से अमेरिकी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे हैं। उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई से जारी हुआ था। उससे पहले उनका पासपोर्ट जाम्बिया में बनाया गया था। 2022 में अमेरिकी नागरिकता मिलने के बाद वे अमेरिका के कैलिफोर्निया के एक अच्छे इलाके में 5 बेडरूम वाले बड़े बंगले में रह रहे थे। यह बंगला करीब 3107 वर्ग मीटर में फैला है। दिलजीत की पत्नी संदीप कौर भी अमेरिकी नागरिक हैं। दिलजीत ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा प्राइवेट रखा है, लेकिन अब यह खुलासा उनके फैंस के लिए चौंकाने वाला है। हालांकि अभिनेता से राजनेता बनने के लिए राजनीति में आने की बात जब उनसे की गई तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। कई लोग सोच रहे थे कि दिलजीत पंजाब की राजनीति में नया चेहरा बन सकते हैं, लेकिन अब इस फैसले का एक और पहलू के सामने आने से उनके राजनीति में आने की सभी संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं. दरअसल विदेशी नागरिकता होने के कारण भारतीय चुनाव लड़ना उनके लिए संभव नहीं है। भारतीय कानून के मुताबिक विदेशी नागरिक भारत की संसद या विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। दिलजीत का जन्म 1984 में पंजाब के दोसांझ कालां गांव में हुआ था। छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने ग्लोबल स्टार बनने का सफर तय किया। वे अमेरिका, कनाडा और यूरोप में बड़े-बड़े शो करते हैं, उनकी सफलता पंजाब के युवाओं के लिए प्रेरणा है। भले ही दोसांझ चुनाव न लड़ें लेकिन वे पंजाब की आवाज बने हुए हैं। चाहे वे जहां भी रहें, उनकी जड़ें पंजाब से जुड़ी हुई हैं। उनका सफर दिखाता है कि प्रतिभा सीमाओं से परे होती है। सिराज/ईएमएस 14मई26 -------------------------------