ट्रंप की बीजिंग यात्रा के बीच अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी महत्वपूर्ण मुलाकात से ठीक पहले एक गोपनीय अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उबाल ला दिया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की कुछ कंपनियां तीसरे देशों के रास्ते ईरान तक घातक हथियार पहुंचाने की गुप्त योजना पर काम कर रही हैं। वॉशिंगटन के गलियारों में चर्चा है कि यह खुलासा ट्रंप के चीन दौरे के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियां इस बात पर विचार कर रही थीं कि हथियारों की खेप को सीधे चीन से भेजने के बजाय किसी अन्य देश के माध्यम से रूट किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सीधे आरोपों से बचा जा सके। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि हथियारों की वास्तविक सप्लाई शुरू हो चुकी है या यह केवल बातचीत के स्तर पर है। फिर भी, इस संभावना ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि उसे डर है कि ईरान सीजफायर की आड़ में अपनी सैन्य शक्ति को दोबारा संगठित करने के लिए चीन की परोक्ष मदद ले रहा है। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि इतनी संवेदनशील हथियार डील बीजिंग के शीर्ष नेतृत्व की जानकारी के बिना संभव नहीं है। इससे पहले अप्रैल में भी ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने ईरान को पोर्टेबल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (मैनपैड्स) उपलब्ध कराई थीं, जो ड्रोन और हेलिकॉप्टर गिराने में सक्षम हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस रिपोर्ट पर फिलहाल सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के मामले में अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है और वे अपने तरीके से जीत हासिल करेंगे। ट्रंप ने यह संकेत दिया कि उनके इस दौरे का मुख्य केंद्र व्यापारिक समझौते ही रहेंगे। इस बीच, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करना दुनिया के लिए सिरदर्द बना हुआ है। वैश्विक तेल आपूर्ति के इस मुख्य मार्ग पर नियंत्रण के जरिए ईरान न केवल सैन्य बल्कि अपनी आर्थिक ताकत भी बढ़ाने में जुटा है। ईरान ने इराक और पाकिस्तान के साथ तेल परिवहन को लेकर नए समझौते किए हैं, जिससे उसे अपने तेल कारोबार से दोगुनी कमाई की उम्मीद है। फिलहाल मध्य-पूर्व में लागू सीजफायर बेहद नाजुक स्थिति में है। अमेरिका जहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर उसके प्रभुत्व को खत्म करना चाहता है, वहीं ईरान प्रतिबंधों को हटाने की मांग पर अड़ा है। ऐसे में चीन दौरे के बीच आए इस नए खुलासे ने अमेरिका, चीन और ईरान के त्रिकोणीय समीकरणों को और अधिक जटिल और तनावपूर्ण बना दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/14मई 2026