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14-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय सेना और नौसेना ने देश की सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में हुए संबद्धता समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन ऑन अफिलिएशन) का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच गहरे तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना है, विशेषकर भविष्य के जटिल युद्ध स्वरूपों और सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर। यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों में संयुक्तता, एकीकरण और बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। समझौते के तहत, सेना और नौसेना की विभिन्न संरचनाओं, रेजीमेंटों, संस्थानों और युद्धपोतों के बीच संस्थागत सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इसके माध्यम से दोनों सेवाओं के अधिकारियों व जवानों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण व्यवस्था और जिम्मेदारियों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। संयुक्त गतिविधियों, पेशेवर आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे परिचालन समन्वय और दीर्घकालिक पेशेवर संबंध मजबूत होगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सफलताओं ने पहले ही यह साबित कर दिया है कि भविष्य के अभियानों में तीनों सेनाओं का समन्वित संचालन कितना महत्वपूर्ण है, और यह समझौता उसी दिशा में एक ठोस कदम है। इस अहम समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना की ओर से एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक और भारतीय नौसेना की ओर से चीफ ऑफ पर्सोनल वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन भी उपस्थित थे। मौजूदा सुरक्षा वातावरण की जटिलता और निरंतर बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखकर थल और जल दोनों क्षेत्रों में मजबूत समन्वय अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हो गया है। जहां नौसेना समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, वहीं सेना देश की स्थलीय सीमाओं की रक्षा का प्राथमिक दायित्व निभाती है। यह समझौता ज्ञापन भविष्य में ऐसी और अंतर-सेवा संबद्धताओं का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे भारतीय सशस्त्र बल आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक एकीकृत तथा सक्षम बन सकें। आशीष दुबे / 14 मई 2026