अंतर्राष्ट्रीय
15-May-2026
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-ट्रंप के भी चीन में दो नाम प्रचलित हैं एक ‘तेलांगपु’ और दूसरा ‘चुआनपु’ बीजिंग,(ईएमएस)। चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक कहानी सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो पर चीन ने बैन लगा रखा था, लेकिन ट्रंप के साथ वह बुधवार को पहली बार चीन की धरती पर उतरे। सवाल यह है कि आखिर ये कैसे मुमकिन हुआ? चीन नहीं चाहता था कि रूबियो के ऊपर से प्रतिबंध हटाए जाएं, लेकिन वह यह भी नहीं चाहता था कि अमेरिकी विदेश मंत्री को देश में आने से रोककर एक डिप्लोमैटिक विवाद खड़ा किया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इन सब से निपटने के लिए चाल चल। चीन ने मार्को रूबियो का नाम ही बदल दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो पर चीन ने 2020 में प्रतिबंध लगाया था। इसमें चीन में एंट्री से जुड़ा बैन भी था। दरअसल रूबियो तब सिर्फ सीनेटर थे। वह चीन के शिनजियांग में उइगर मुसलमानों पर अत्याचार और हांगकांग की मानवाधिकार स्थिति को लेकर लगातार कड़ी आलोचना करते थे। इससे नाराज चीन ने मार्को रूबियो समेत कई अन्य नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन अब तस्वीर बदल गई। ट्रंप ने उन्हें विदेश मंत्री बना दिया, जिस कारण चीन को मजबूरी में अपना रुख बदलना पड़ा। चीन ने साफ कहा कि रूबियो पर लगा प्रतिबंध उनके सीनेटर रहने के दौरान दिए गए बयानों के कारण है, न कि उनके मौजूदा काम के आधार पर। चीन ने अपनी भाषा में मार्को रुबियो के नाम में छोटा सा बदलाव कर दिया, जिस कारण रूबियो के लिए चीन के दरवाजे खुल गए। चीन ने रूबियो के नाम का चीनी ट्रांसलिटरेशन बदल दिया यानी उनके नाम को चीनी भाषा में लिखने का तरीका बदल दिया। इससे तकनीकी तौर पर पुराने प्रतिबंध लागू नहीं होते और रुबियो की एंट्री का रास्ता साफ हो गया। रूबियो का स्टैंडर्ड चीनी नाम ‘माक लूबि आओ’ था। इसका उच्चारण थोड़ा अलग है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिमी नेताओं के नाम का चीनी अनुवाद हमेशा तय नहीं होता। एक ही व्यक्ति के कई चीनी नाम हो सकते हैं। खुद डोनाल्ड ट्रंप के भी दो नाम प्रचलित हैं। एक ‘तेलांगपु’ और दूसरा ‘चुआनपु’। चीन की सरकार आमतौर पर पहला नाम इस्तेमाल करती है। सिराज/ईएमएस 15 मई 2026