राज्य
15-May-2026


ठाणे, (ईएमएस)। मुंबई से सटे ठाणे की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2016 के नाबालिग का अपहरण, मानव तस्करी और दुष्कर्म मामले में तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले के “मूलभूत तथ्यों” को साबित करने में विफल रहा। विशेष न्यायाधीश जी.टी.पवार ने आरोपी काजल ठाकुर (31), मोसिन नसीम खान (31) और गोविंद उर्फ ​​राजेश मेपालल सथालिया (50) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत लगे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 जनवरी 2016 को काजल ठाकुर ने 17 वर्षीय किशोरी का अपहरण किया था और उसे विभिन्न लॉज में ले गई थी, जहां मोसिन खान ने उसके साथ कथित रूप से दुष्कर्म किया, जबकि राजेश सथालिया ने उसके साथ छेड़छाड़ और हमला करने की कोशिश की। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता नशे की लत से जूझ रही थी और काउंसलिंग ले रही थी। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना से पहले वह चार बार घर छोड़ चुकी थी। कोर्ट ने अपहरण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता ने अपनी गवाही में यह नहीं बताया कि काजल ठाकुर ने उसे जबरन या बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने के लिए मजबूर किया था। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयान में भी विरोधाभास पाए। पीड़िता ने दावा किया था कि उसके साथ 11 जनवरी 2016 को दुष्कर्म हुआ, जबकि उसने डॉक्टर को 10 जनवरी को ही दुष्कर्म होने की जानकारी दी थी। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पीड़िता पर पुलिस के पास न जाने का कोई दबाव था। अदालत के अनुसार, कथित घटना के बाद भी वह आरोपी काजल के साथ उसी कमरे में रह रही थी, जो आरोपी राजेश द्वारा उपलब्ध कराया गया था। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने में पांच दिन की देरी और आरोपियों के साथ पीड़िता के लॉज में ठहरने के सबूत के तौर पर रजिस्टर पेश न किए जाने को भी गंभीर कमी माना। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला भरोसेमंद नहीं है और आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसके आधार पर तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया। स्वेता/संतोष झा- १५ मई/२०२६/ईएमएस